ग्रीनलैंड भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। यहां की जनसंख्या बेहद कम है, लेकिन इसका क्षेत्रफल और सामरिक स्थिति इसे वैश्विक शक्तियों के लिए बेहद अहम बना देती है। आर्कटिक में स्थित होने के कारण यह उत्तरी गोलार्द्ध में समुद्री मार्गों और सैन्य निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ट्रंप के बयान ने क्यों बढ़ाई चिंता?
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की आवश्यकता बताई। इससे दुनिया भर में यह आशंका बढ़ी कि अमेरिका भविष्य में इस द्वीप पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर सकता है। डेनमार्क ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क दोनों नाटो का हिस्सा हैं और किसी भी तरह की धमकी स्वीकार्य नहीं है।
वेनेजुएला कार्रवाई के बाद क्यों बदली दिशा?
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद जब ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर बयान दिया, तो यह स्पष्ट हो गया कि अमेरिका अब अपने सामरिक और आर्थिक हितों को आर्कटिक तक विस्तार देना चाहता है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या ग्रीनलैंड भविष्य में अमेरिकी रणनीति का अगला लक्ष्य बन सकता है।
प्राकृतिक संसाधनों का खजाना
ग्रीनलैंड की अर्थव्यवस्था मुख्यतः मछली उद्योग पर आधारित है, लेकिन यहां मौजूद प्राकृतिक संसाधन इसे अनमोल बनाते हैं। दुर्लभ खनिज, यूरेनियम, लोहा और अन्य धातुएं यहां भारी मात्रा में पाई जाती हैं। वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण बर्फ के पिघलने से इन संसाधनों तक पहुंच आसान होती जा रही है, जो महाशक्तियों की रुचि बढ़ा रही है।
बदलता जलवायु और नए समुद्री मार्ग
आर्कटिक में बर्फ पिघलने से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जो व्यापार, सैन्य रणनीति और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम हैं। रूस और चीन की बढ़ती उपस्थिति ने अमेरिकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है। ऐसे में ग्रीनलैंड को एक सामरिक मोहरे के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य के वैश्विक समीकरणों में निर्णायक साबित हो सकता है।
नाटो ढांचे में ग्रीनलैंड की भूमिका
ग्रीनलैंड नाटो गठबंधन का हिस्सा होने के कारण पहले से ही अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यहां अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की आंशिक अनुमति पहले से मौजूद है। लेकिन नियंत्रण या स्वामित्व का सवाल अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के मुद्दों को जन्म देता है, जिस पर डेनमार्क स्पष्ट रूप से विरोध दर्ज करा चुका है।
क्या ग्रीनलैंड भविष्य में स्वतंत्र होगा?
ग्रीनलैंड को स्वशासन प्राप्त है और जनमत संग्रह के माध्यम से भविष्य में स्वतंत्रता भी संभव है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि ग्रीनलैंड स्वतंत्र देश बनता है तो वैश्विक शक्तियों के साथ उसके संबंध कैसे बदलेंगे—और क्या उस स्थिति में अमेरिका की रणनीतिक योजना और मजबूत होगी?
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