ग्वालियर. राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शुक्रवार को ग्वालियर स्थित दारूल कुरआन मदरसे में कार्रवाई की। इस दौरान चार से 16 वर्ष के 22 बच्चों को मुक्त कराया गया। मदरसा प्रबंधन मान्यता से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। अधिकारियों को बच्चों की पढ़ाई सुरक्षा और देखरेख की व्यवस्था में कई कमियां मिलीं। लिहाजा बाल कल्याण समिति की निगरानी में छोटे बच्चों को शिशु गृह तथा बड़े बच्चों को उम्र के अनुसार अन्य जगह शिफ्ट कराया गया। कार्रवाई दोपहर से शाम तक चली। पूरे प्रकरण ने स्थानीय स्तर पर चर्चा पैदा कर दी है।
बाल कल्याण समिति को मिली सूचना
बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि एजी ऑफिस के पास स्थित दारूल कुरआन मदरसे में बिना मान्यता के अवैध ढंग से बच्चों को रखा जा रहा है। यह सूचना राज्य बाल संरक्षण आयोग तक पहुंची। आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने खुद विभागीय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर छापेमारी की। सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई की गई। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई। गुप्त सूचना ने पूरे मामले को प्रकाश में लाया।
आयोग की अध्यक्ष की मौजूदगी में छापेमारी
आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा विभागीय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचीं। प्रबंधन से मान्यता और बच्चों से संबंधित दस्तावेज मांगे गए लेकिन वह कोई अभिलेख नहीं दे सका। जांच के दौरान तीन बच्चियां कमरे में बंद मिलीं। पूरे मदरसे का निरीक्षण किया गया। अलग-अलग कक्ष बने थे और बच्चों के लिए रहने की व्यवस्था थी। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि सुरक्षा व देखरेख की कोई समुचित व्यवस्था नहीं थी। अध्यक्ष की मौजूदगी ने कार्रवाई को गंभीरता प्रदान की।
दस्तावेज न मिलने और कमियों का खुलासा
मदरसा प्रबंधन मौके पर कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका। उसने बच्चों को फौरन छोड़ने की मांग की और कहा कि दस्तावेज देने में समय लगता है। अधिकारियों को बच्चों की पढ़ाई सुरक्षा और देखरेख की व्यवस्था में गंभीर खामियां नजर आईं। मान्यता न होने के बावजूद बच्चों को रखने का मामला सामने आया। सुरक्षा मानकों का पालन न होना चिंता का विषय बना। इन कमियों के आधार पर बच्चों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया।
बच्चों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया
बाल कल्याण समिति की निगरानी में छोटे बच्चों को शिशु गृह में भेजा गया। बड़े बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार अन्य उपयुक्त स्थानों पर शिफ्ट कराया गया। बच्चों की सुरक्षा और देखरेख को प्राथमिकता दी गई। आगे की प्रक्रिया बाल कल्याण समिति के दिशानिर्देशों के अनुसार चलेगी। परिवारों से संपर्क और पुनर्वास की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। बच्चों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए सभी कदम उठाए गए।
पहले की लापता घटना और आगे की कार्रवाई
कुछ दिन पहले इसी मदरसे में रहने वाला मेवाती मोहल्ले का 13 वर्षीय बालक लापता हो गया था। 15 अक्टूबर को हुई इस घटना के बाद थाने में शिकायत की गई थी। बाद में बालक मिल गया था। इस घटना ने भी मदरसे की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। अब आयोग और संबंधित विभाग आगे की जांच जारी रखेंगे। मान्यता और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।