धार: मध्यप्रदेश के किसानों के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज धार जिले के सरदारपुर में नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का लोकार्पण करेंगे। इस परियोजना से धार और झाबुआ जिले के कुल 260 गांवों की 57,422 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना के तहत नर्मदा नदी से पानी का उद्वहन कर आधुनिक भूमिगत पाइप नहर प्रणाली के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने, कृषि उत्पादन बढ़ाने और जल के बेहतर उपयोग में मदद मिलने की उम्मीद है।
धार और झाबुआ के 260 गांवों को मिलेगा फायदा
नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना से दो जिलों की कृषि भूमि को लाभ मिलने की संभावना है। परियोजना में धार जिले के 66 गांवों की 25,422 हेक्टेयर भूमि और झाबुआ जिले के 194 गांवों की 32,000 हेक्टेयर भूमि शामिल है।इस परियोजना से संबंधित क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे बारिश पर निर्भर रहने वाले किसानों को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
झाबुआ जिले की किन तहसीलों को मिलेगा लाभ?
परियोजना के तहत झाबुआ जिले की विभिन्न तहसीलों में सिंचाई सुविधा का विस्तार किया जाएगा।
झाबुआ तहसील: 108 गांव, 17,802 हेक्टेयर भूमि।
पेटलावद तहसील: 6 गांव, 1,502 हेक्टेयर भूमि।
मेघनगर तहसील: 28 गांव, 5,504 हेक्टेयर भूमि।
थांदला तहसील: 39 गांव, 5,927 हेक्टेयर भूमि।
रामा तहसील: 12 गांव, 1,185 हेक्टेयर भूमि।
राणापुर तहसील: 1 गांव, 80 हेक्टेयर भूमि।
इस तरह झाबुआ जिले की छह तहसीलों के 194 गांवों की कुल 32,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को परियोजना से लाभ पहुंचाने की योजना है।
धार जिले के सरदारपुर तहसील के 66 गांव होंगे लाभान्वित
धार जिले में परियोजना के अंतर्गत सरदारपुर तहसील के 66 गांवों की 25,422 हेक्टेयर कृषि भूमि शामिल है।सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को फसलों की जरूरत के अनुसार सिंचाई करने में मदद मिल सकती है। इससे कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और उत्पादन में सुधार की संभावनाएं हैं।
भूमिगत पाइपलाइन से खेतों तक पहुंचेगा पानी
इस परियोजना की प्रमुख विशेषता भूमिगत पाइप नहर प्रणाली है। इसके माध्यम से खेतों तक दबावयुक्त जल पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।परियोजना के अनुसार, 2.5 हेक्टेयर के चक तक 20 मीटर दबावयुक्त जल उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसान ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई पद्धतियों का इस्तेमाल कर सकेंगे।
इस तकनीक के संभावित फायदे हैं
खेतों तक पानी पहुंचाने की सुविधा बेहतर होगी।
ड्रिप और स्प्रिंकलर से सिंचाई करना आसान होगा।
पानी का अधिक उपयोगी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
पारंपरिक सिंचाई की तुलना में जल प्रबंधन में मदद मिलेगी।
सिंचाई के लिए खेतों को समतल करने की जरूरत कम हो सकती है।
नर्मदा नदी से उठाया जाएगा 186.62 MCM पानी
परियोजना के तहत धार जिले की कुक्षी तहसील के चंदनखेड़ी गांव में नर्मदा नदी से पानी का उद्वहन किया जाएगा।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परियोजना के लिए 186.62 मिलियन घन मीटर (MCM) जल का उद्वहन प्रस्तावित है। इसके बाद निर्धारित प्रणाली के जरिए संबंधित क्षेत्रों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जाएगा।नर्मदा नदी के जल का उपयोग कर सिंचाई सुविधा का विस्तार करना इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है।
किसानों को क्या होगा फायदा?
परियोजना के शुरू होने से धार और झाबुआ के किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे फसलों की जरूरत के मुताबिक पानी देने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।इसके अलावा, आधुनिक सिंचाई पद्धतियों के उपयोग से जल प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
सरदारपुर में होगा परियोजना का लोकार्पण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव धार जिले के सरदारपुर में नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला-सरदारपुर माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना का लोकार्पण करेंगे।परियोजना से धार और झाबुआ जिले के कुल 260 गांवों की 57,422 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। भूमिगत पाइपलाइन और दबावयुक्त जल प्रणाली के जरिए किसानों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।