कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी आज बांसवाड़ा के मानगढ़ धाम जाएंगे। विश्व आदिवासी दिवस पर राहुल गांधी मेवाड़ के इस इलाके में एक रैली को संबोधित करेंगे, जिसमें भारी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल होंगे। कांग्रेस पार्टी के इन दो नेताओं के इस दौरे के पीछे वो 59 सीटें हैं, जिसमें से ज्यादातर को जीत कर राजस्थान में पिछली बार कांग्रेस की सरकार बनी थी।
राजस्थान विधानसभा में 200 सीट हैं. इनमें से 59 सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। 34 सीटें अनुसूचित जाति के लिए और 25 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित हैं। वहीं जनसंख्या के लिहाज से देखें तो सूबे की 17.8 फीसदी आबादी दलित और 13.5 फीसदी आबादी आदिवासी समुदाय की है। यानी कुल जमा राजस्थान में SC-ST समुदाय की आबादी 31 फीसदी से ज्यादा है। यानी लगभग सूबे का एक तिहाई मतदाता इन समुदायों से है।
दिग्गजों की क्यों है यहां नजर
राजस्थान की सियासी मजबूरी है कि न ही कांग्रेस और न ही बीजेपी इन समुदायों को छोड़ना चाहेगी। पिछले चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने इनमें से 31 सीटें जीतीं और इनके बूते राज्य की सत्ता हासिल की। अब राजस्थान में फिर एक बार विधानसभा के चुनाव नजदीक आ गए हैं। ऐसे में इन इलाकों में लगातार दोनों ही बड़े दलों के दिग्गज दौरा कर रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी के दोनों वरिष्ठ नेता इसी कड़ी में बुधवार को बांसवाड़ा पहुंच रहे हैं। एक तरफ जहां खड़गे दलित समुदाय से आते हैं तो उनके बूते पार्टी दलित समुदाय को अपने पाले में खींचने की कोशिश कर रही है तो वहीं आदिवासी दिवस पर राहुल गांधी की कोशिश आदिवासी समुदाय को साधने की होगी। बुधवार की रैली में मुख्य ध्यान आदिवासी समुदाय पर दिया जाएगा। यहीं से राजस्थान में कांग्रेस का चुनावी शंखनाद भी होगा।
बांसवाड़ा से साधेंगे तीन-तीन राज्य
वाकड़ का ये इलाका मध्य प्रदेश और गुजरात के आदिवासी इलाकों से जुड़ा हुआ है तो इसका सीधा असर उन राज्यों में भी दिखाई देता है। मध्य प्रदेश में भी राजस्थान के साथ-साथ विधानसभा चुनाव होना है। मध्य प्रदेश में भी आदिवासी समुदाय के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों पर पिछले चुनावों में बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई है और कांग्रेस की मजबूत. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश की 47 आदिवासी आरक्षित सीटों में 31 जीतने में कामयाब हुई थी। जिसके बूते पार्टी ने सूबे में सरकार बना भी ली थी।
2013 तक इन सीटों पर बीजेपी की पकड़ थी. 2013 में बीजेपी ने इन 47 में से 37 सीटें जीती थीं। अगले चुनाव में बीजेपी 37 से 16 सीटों पर आ गई। जो सीटें बीजेपी से छिटकी वो कांग्रेस के पास गईं। कांग्रेस अब आदिवासी समुदाय के इस समर्थन को हरगिज भी गंवाना नहीं चाहती। इसलिए वो आदिवासियों के गौरव से जुड़े मानगढ़ के जरिए राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के आदिवासी समुदाय को खुद से जोड़ना चाहती है।
मानगढ़ धाम को ही क्यों चुना?
कांग्रेस ने बांसवाड़ा के जिस मानगढ़ धाम को चुना है उसे आदिवासियों का तीर्थ स्थल कहा जाता है। बताया जाता है कि इसी मानगढ़ की पहाड़ी पर 17 नवंबर 1913 को अंग्रेजों ने 1500 आदिवासियों को मार डाला था। जलियांवाला बाग नरसंहार से बड़े इस कांड और उन 1500 भील आदिवासियों की याद में मानगढ़ की पहाड़ी पर मानगढ़ धाम बनाया गया है,
Comments (0)