प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के सागर में बनने वाले भव्य संत रविदास मंदिर की नींव रख दी है। यह मंदिर 100 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा। पीएम मोदी ने कहा की संत रविदास के इस भव्य मंदिर की नींव रखने का मौका मुझे मिला है। भारत माता की जय के नारे के साथ पीएम मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया। उन्होंने कहा कि सागर की धरती, रविदास जी का आशीर्वाद और आप सभी महानुभाव है। आज सागर में समरसता का महासागर उमड़ा हुआ है। इस संस्कृति को और समृद्ध करने के किए कला संग्रालय की नीव पड़ी है।
संत रविदास स्मारक में दिव्यता भी होगी और भव्यता भी होगी
एक साल के बाद जब यह मंदिर बन जाएगा, तो फिर आऊंगा। मुझे बनारस में कई बार उनकी जन्म स्थली पर जाने का सौभाग्य मिला है। संत रविदास स्मारक में दिव्यता भी होगी और भव्यता भी होगी। भूमिपूजन से पहले प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विभिन्न सम्प्रदायों के साधु-संतों का अभिवादन किया। इसी के साथ प्रदेश के पांच स्थानों से प्रारंभ की गई समरसता यात्रा का भी आज समापन हुआ। पीएम मोदी ने मंदिर निर्माण के लिए मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा की इस मंदिर के निर्माण के लिए शिवराज सरकार के काम के लिए भी मैं उन्हें धन्यवाद देना चाहता हूं। जबकि यहां की जनता का भी धन्यवाद करता हूं।
संत रविदास ने ही हमें अत्याचार के खिलाफ लड़ना सिखाया
पीएम मोदी ने कहा कि संत रविदास ने ही हमें अत्याचार के खिलाफ लड़ना सिखाया। जब मुगलों के काल में कई तरह की पाबंदियां लगाई जा रही थी। तब पराधीनता सबसे बड़ा पाप बना गया था। तब संत रविदास ने कहा था कि जो पराधीनता स्वीकार कर लेता है, जो लड़ता नहीं है उससे कोई प्रेम नहीं करता है। लेकिन इसी अत्याचार के खिलाफ संत रविदास ने सभी को लड़ने का हौसला दिया है।
किसी को भी खाली पेट नहीं सोने दूंगा
पीएम मोदी ने कहा कि संत रविदास कहते थे कि ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सबन को अन्न, छोट बड़ों सब से, रैदास रहें प्रसन्न। आज आजादी के अमृतकॉल में देश को गरीबी और भूख से मुक्त कराने का प्रयास किया जा रहा है। कोरोना के दौर में दुनिया की व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमरा गई थी। लेकिन मैंने तब कहा था कि किसी को भी खाली पेट नहीं सोने दूंगा। मैं भूखे रहने की तकलीफ जानता हूं, भूख क्या होती है यह मुझे पता है। इसलिए कोविड के दौरान हमारे प्रयासों की तारीफ पूरी दुनिया में हुई है। देश में जो भी योजनाएं चल रही हैं उन योजनाओं से दलित आदिवासी और पिछड़े समाज का कल्याण हो रहा है। पहले ये योजनाएं केवल चुनावी समय में होती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। क्योंकि सबका साथ सबका विकास के संकल्प के साथ ही हमें आगे बढ़ना है।
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