सात राज्यों की तेरह विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों के बाद एक बार फिर बहस शुरू हो गई है कि देश की सियासत किधर जा रही है। विपक्ष को इन परिणाम के बाद एक बार उम्मीद की किरण दिखा रही है. इन चुनावों में इंडिया गठबंधन की पार्टियों ने जहां 10 सीटें जीत लीं वहीं बीजेपी सिर्फ़ दो सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी। एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के हिस्से में गई है।
उपचुनाव के नतीजों से अतिउत्साह में तो नहीं विपक्ष ?
लोकसभा चुनावों में उम्मीद से बढ़िया प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस इन परिणामों के बाद अति उत्साह में है। हालांकि बीजेपी इन्हें अपने लिए कोई बड़ा झटका नहीं मान रही है।भाजपा का मानना है कि उसे उपचुनाव में ज्यांदा नुकसान नहीं हुआ है. क्योंकि जिन 13 सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, उनमें से बीजेपी के पास सिर्फ़ चार सीटें ही थीं .लेकिन राजनीति के जानकार बीजेपी की इस प्रतिक्रिया को रेगिस्तान में तूफान के समय शुतुरमुर्ग के सिर छिपाने जैसा ही मानते हैं।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये बीजेपी के लिए चेतावनी है कि अगर अब भी ना संभले तो आगे भी राह आसान नहीं है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष ये साबित करने में कामयाब रहा कि मोदी सरकार खास नहीं कर रही।कृषि कानूनों की वापसी के बाद भी किसान संतुष्ट नहीं है।.यही वजह है कि उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में किसानों ने झटका दिया है।अग्निवीर को लेकर भी विपक्ष युवाओं का गुस्सा भुनाने की पूरी कोशिश कर रहा है।.दूसरी ओर किसानों के बाद जवानों को भी समझाने में सरकार असफल साबित हुई है.. इसके साथ ही
भाजपा कार्यकर्ता का भी उत्साह ठंडा पड़ रहा है.यही हाल रहे तो इस साल जिन तीन प्रदेशों में चुनाव होने हैं जिनमें बीजेपी घिर सकती है।
क्या हो सकता है अगले चुनावों में इन नतीजों का असर ?
महाराष्ट्र-हरियाणा और झारखंड में इस साल वोटिंग होनी है..उपचुनाव के परिणामों को देखें तीनों राज्यों में बीजेपी को मुश्किल हो सकती है.. हरिय़ाणा में 2019 के चुनाव में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था..जेजेपी के सहयोग से बीजेपी को सरकार बनाना पड़ा था..लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने जेजेपी से भी नाता तोड़ लिया है..महाराष्ट्र में लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद बीजेपी सन्नाटे में है..वहां भी भाजपा की सत्ता में वापसी फिलहाल आसान नहीं दिख रही.विधान परिषद में मैनेजमेंट से मिली जीत को आम चुनावों से नहीं जोड़ा जा सकता..झारखंड में बीजेपी के लिए लोकसभा चुनाव के नतीजे जरूर उत्साहवर्धक रहे हैं लेकिन वहां भी अब हेमंत सोरेन अब फिर से मैदान में आ चुके हैं।अगले साल दिल्ली से विधानसभा चुनाव की शुरुआत होगी आम आदमी पार्टी अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के जेल से सिंपैथी का फायदा उठाने की पूरी तैयारी में है. अगले साल बिहार में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं लेकिन वहां बीजेपी अपने पैरों पर खड़ा होने लायक एक कद्दावर नेता नहीं तैयार कर सकी है....ऐसे में सात राज्यों में उपचुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी को मनन करने की जरूरत है।
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