इतिहास का एक बड़ा हिस्सा अपने नाम लिखवाने वाले मुग़ल साम्राज्य के बारे में लोगों की राय शुरू से बटी रही है, कुछ लोग उनकी अच्छाइयों के बारे में बात करते हैं तो कुछ लोग उनके वक़्त की खामियों या यूं कहें कि उनके परम्परागत शौकीन मिजाज़ पर तंज कसते हैं !
कई विदेशी लेखकों ने अपनी किताबों में इस बात को उजागर किया है कि मुग़ल शासक हरम को बहुत ज्यादा भव्यता से maintain रखते थे !
हरम की दासियों को मिलता था मासिक भत्ता –
इतिहास पढ़ते वक़्त जब हरम शब्द आता है तो आमतौर पर टीचर को इसी छूकर निकलते देखा जाता है लेकिन उस वक़्त के कुछ राइटर और व्यापारियों ने अपने द्वारा लिखी किताबों में मुगलों के समय को थोडा खोल के बताया है !जैसे कि डच व्यापारी फ्रांसिस्को पेलसर्ट ने अपनी लिखी किताब ‘जहांगीर इंडिया’ में जहांगीर को इतिहास का सबसे बड़ा विलासी और हमेशा भोग-विलास में धुत्त रहने वाला बताया है !
फ्रांसिस्को ने अपनी किताब में लिखा है कि जहांगीर अपने दरवार में सैंकड़ों दासियां रखता था जिनके रहने के स्थान को हरम कहा जाता था ! हरम में रहने वाली हर दासी को मासिक भत्ता भी दिया जाता था जिसे ज़्यादातर दासियां अपनी साजो-सज्जा में खर्च करती थीं क्यूंकि उन्हें बादशाह को आकर्षित करना होता था !ऐसा कहा जाता है कि जिस दासी को बादशाह पसंद करता था उसके लिए अतिरिक्त सुविधाएं दी जाती थीं !
और अगर कोई दासी बादशाह को पसंद नहीं आती थी तो उसे फिर कभी भी बादशाह के सामने नहीं लाया जाता था !कहा ये भी जाता है कि जहांगीर की 20 शादियां उसके 25 साल के होने तक हो गई थीं –
कई विदेशी लेखकों ने अपनी किताबों में इस बात को उजागर किया है कि मुग़ल शासक हरम को बहुत ज्यादा भव्यता से maintain रखते थे !
हरम के बारे में कई बातें कही जाती हैं जिनमें से कुछ उनकी ख़ूबसूरती और भव्यता का बखान करती हैं तो वहीं कुछ इसे अय्यियाशी का अड्डा बताकर इसकी तमाम खामियों को उजागर करती हैं
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