संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए शुरुआती तौर पर छह घंटे का समय निर्धारित किया है। हालांकि, यदि आवश्यक हुआ तो चर्चा की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार चर्चा दोपहर 12 बजे से शुरू होने की संभावना है।
सोमवार को विपक्ष के साथ हुई सहमति के बाद सरकार ने इस विधेयक को सदन में पेश किया। माना जा रहा है कि यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
2024 के कानून में होंगे महत्वपूर्ण बदलाव
यह संशोधन विधेयक वर्ष 2024 में लागू किए गए पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में बदलाव का प्रस्ताव करता है। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक, नकल और परीक्षा से जुड़ी अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।संशोधन के तहत दोषियों के खिलाफ और अधिक कड़े दंडात्मक प्रावधान किए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे।
आरोपियों पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार पेपर लीक, प्रश्नपत्रों की अवैध खरीद-फरोख्त, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और अन्य अनुचित गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा के साथ भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।सरकार का मानना है कि सख्त दंड व्यवस्था से परीक्षा माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
राज्यों को मिलेगा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का अधिकार
विधेयक का एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित कर सकेंगे।
इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी, जिससे लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा हो सकेगा। सरकार का उद्देश्य दोषियों को जल्द सजा दिलाकर परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत करना है।
विपक्ष ने भी दी चर्चा के लिए सहमति
सोमवार को संसद में हंगामे के बीच विपक्ष ने भी इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के लिए सहमति दे दी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने चर्चा के लिए छह घंटे का समय निर्धारित किया।
संसद में विभिन्न राजनीतिक दल इस विधेयक के प्रावधानों, दंड व्यवस्था, राज्यों की भूमिका और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रख सकते हैं।
क्यों जरूरी है यह संशोधन?
पिछले कुछ वर्षों में देशभर में कई प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के कारण लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ी और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे।
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कानून को और अधिक प्रभावी बनाने का फैसला किया है। संशोधित प्रावधानों के लागू होने के बाद पेपर लीक जैसे मामलों की जांच और सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में कदम
सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं, बल्कि सार्वजनिक परीक्षाओं को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना भी है। यदि संसद से यह विधेयक पारित होता है, तो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परीक्षा संबंधी अपराधों के खिलाफ अधिक प्रभावी कानूनी व्यवस्था लागू करने में मदद मिलेगी।
यह विधेयक लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने और देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।