प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने संबोधन में कहा कि आज पूरे देश में खेलों को लेकर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। पहले जहां खेलों को करियर के रूप में चुनने वाले युवा सीमित थे, वहीं अब बेहतर सुविधाओं, संरचित प्रशिक्षण और सरकारी समर्थन के कारण खेलों को लेकर नया विश्वास पैदा हुआ है। वाराणसी जैसे सांस्कृतिक और परंपराओं से भरपूर शहर में राष्ट्रीय टूर्नामेंट का आयोजन इस बदलाव का प्रतीक है।
एथलीट–केंद्रित खेल मॉडल की दिशा में बड़ा कदम
पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में खेल बजट में हुई वृद्धि ने खिलाड़ियों के लिए नई संभावनाएँ खोली हैं। अब टैलेंट की पहचान, वैज्ञानिक ट्रेनिंग, पोषण प्रबंधन और पारदर्शी चयन प्रणाली पर खास ध्यान दिया जा रहा है। इससे प्रदर्शन में निरंतर सुधार के साथ-साथ खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना भी मजबूत हुई है, जो किसी भी खेल नीति की बड़ी सफलता है।
देश रिफॉर्म एक्सप्रेस पर आगे बढ़ रहा है
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत का हर सेक्टर सुधार और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। खेल क्षेत्र भी इस परिवर्तन का अहम हिस्सा है। नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट और खेलो भारत नीति 2025 जैसे कदमों ने टैलेंट को सही प्लेटफ़ॉर्म देने का मार्ग प्रशस्त किया है। अब खिलाड़ी बिना अनिश्चितता के, पूरी निष्ठा से प्रशिक्षण पर फोकस कर पा रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत हो रही है।
काशी—खेल और संस्कृति की जीवंत धरती
मोदी ने काशी को खेल प्रेमी शहर बताते हुए कहा कि कुश्ती, नौका दौड़ और मुक्केबाजी जैसी पारंपरिक खेल गतिविधियों ने यहां की पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि काशी की जनता खेल भावना को मन से जीती है और यही उत्साह खिलाड़ियों को प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता सिर्फ खेल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का उत्सव भी है।
वॉलीबॉल—टीमवर्क, संतुलन और संकल्प का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने वॉलीबॉल को एक ऐसा खेल बताया जो केवल कौशल नहीं, बल्कि टीमवर्क और संतुलन का शानदार उदाहरण है। जैसे हर खिलाड़ी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, वैसे ही देश की प्रगति में हर नागरिक का योगदान मायने रखता है। उन्होंने कहा कि मैदान पर जो तालमेल और अनुशासन दिखाई देता है, वही भावना राष्ट्र निर्माण में भी आवश्यक है।
युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश
मोदी ने सभी खिलाड़ियों से कहा कि यह चैंपियनशिप सिर्फ पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि सीखने, आत्मविश्वास बढ़ाने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाला समय भारतीय खेलों के लिए स्वर्णिम युग साबित होगा और युवा पीढ़ी नई ऊंचाइयां प्राप्त करेगी।
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