उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। संस्कृत शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्रदेश के हर जिले में गुरुकुल पद्धति का एक-एक विद्यालय खोला जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश के पिछड़े विकासखंडों में आश्रम पद्धति आधारित आवासीय विद्यालयों की स्थापना की भी योजना बनाई गई है।
शिक्षा को पारंपरिक किया जा रहा है
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बुधवार को वर्ष 2026 में प्रस्तावित नए कार्यों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह कदम नई शिक्षा नीति के अनुरूप उठाया जा रहा है, जिससे संस्कृत और पारंपरिक शिक्षा को मजबूत किया जा सके।
छात्रों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर जोर
शिक्षा मंत्री ने बताया कि नई शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के तहत एससीईआरटी (SCERT) द्वारा तैयार की गई राज्य पाठ्यचर्या को लागू किया जाएगा। इस नई पाठ्यचर्या में विद्यालयी शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष फोकस किया गया है, ताकि छात्रों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा मिल सके।
शिक्षा विभाग में छह हजार से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी
उन्होंने आगे बताया कि नए वर्ष में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में छह हजार से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। प्राथमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक बेसिक के 1670 पद, सहायक अध्यापक (विशेष शिक्षा) के रिक्त पदों, तथा माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रवक्ता के 808 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पहले से ही चल रही है।
केंद्र के 18 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी
इसके अलावा, सहायक अध्यापक एलटी के एक हजार से अधिक पद भी नए वर्ष में भरे जाएंगे। वहीं समग्र शिक्षा अभियान के तहत 324 लेखाकार-कम सपोर्टिंग स्टाफ, 161 विशेष शिक्षक, 95 कैरियर काउंसलर और विद्या समीक्षा केंद्र के 18 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। शिक्षा विभाग के विभिन्न कार्यालयों और विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 2364 रिक्त पदों को आउटसोर्सिंग के माध्यम से भरा जा रहा है। राज्य सरकार के इन फैसलों से न केवल संस्कृत और पारंपरिक शिक्षा को नई दिशा मिलेगी, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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