कोलकाता: पश्चिम बंगाल के शहरी इलाकों में स्थित अस्पतालों की साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन को लेकर राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने पहल की है। अस्पताल परिसरों में जमा होने वाले कचरे को नियमित रूप से हटाने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नगर विकास एवं नगरपालिका मामलों के विभाग को पत्र लिखा है। इस पत्र में राज्य की नगरपालिकाओं और नगर निगमों को अस्पतालों की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का प्रस्ताव दिया गया है।
23 अक्टूबर को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने लिखा पत्र
राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव नारायण स्वरूप निगम ने 23 अक्टूबर 2026 को राज्य के नगर विकास एवं नगरपालिका मामलों के विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखा। इसमें शहरी क्षेत्रों के अस्पतालों में सामान्य कचरे के प्रबंधन, नियमित सफाई और बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव को लेकर जरूरी कदम उठाने का प्रस्ताव दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि अस्पताल परिसरों में कचरा जमा न हो और मरीजों, उनके परिजनों तथा स्वास्थ्यकर्मियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
अस्पतालों में कचरा जमा करने के लिए निर्धारित स्थान बनाने का प्रस्ताव
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल परिसरों में सामान्य कचरा जमा करने के लिए निर्धारित स्थान या उचित संग्रह केंद्र बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। अस्पतालों के अलग-अलग हिस्सों में कचरा बिखरा रहने की समस्या को कम करने के लिए व्यवस्थित कचरा संग्रह प्रणाली पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही अस्पतालों के व्यस्त इलाकों में पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान रखने की जरूरत भी बताई गई है, ताकि लोग इधर-उधर कचरा फेंकने के बजाय निर्धारित स्थानों पर ही उसे डाल सकें।

ओपीडी और इमरजेंसी के बाहर लगाए जाएंगे अलग-अलग रंगों के डस्टबिन
अस्पतालों के बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी, मरीजों के परिजनों के प्रतीक्षालय और इमरजेंसी विभाग के बाहर अलग-अलग रंगों के कचरा संग्रह पात्र लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। इन जगहों पर मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे में पर्याप्त डस्टबिन उपलब्ध होने से कचरे को निर्धारित स्थान पर जमा करने और उसके उचित पृथक्करण में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन पात्रों की नियमित सफाई और समय पर कचरा हटाने की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
रोजाना कचरा उठाने पर जोर, सड़कों और ड्रेनेज की मरम्मत का भी प्रस्ताव
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों से निकलने वाले सामान्य कचरे को नियमित रूप से हटाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। इसके साथ ही अस्पताल परिसर के अंदर की सड़कों, विभिन्न भवनों को जोड़ने वाली सड़कों और ड्रेनेज सिस्टम के रखरखाव एवं मरम्मत का प्रस्ताव भी दिया गया है। अस्पतालों में बेहतर सफाई व्यवस्था के लिए केवल कचरा हटाना ही नहीं, बल्कि परिसर की बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त रखना भी जरूरी माना जा रहा है।
पेड़ों की छंटाई से लेकर झाड़ियों की सफाई तक की जिम्मेदारी
अस्पताल परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए पेड़ों की नियमित छंटाई, खरपतवार हटाने और झाड़ियों की सफाई जैसे कार्यों पर भी जोर दिया गया है। लंबे समय तक इन क्षेत्रों की सफाई नहीं होने से परिसर में गंदगी जमा हो सकती है। इसलिए स्थानीय नगर निकायों को नियमित रखरखाव की व्यवस्था करने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि अस्पतालों के अंदर और आसपास का वातावरण साफ-सुथरा बना रहे।
सफाई व्यवस्था के लिए नोडल अधिकारियों की जानकारी मांगी जाएगी
अस्पतालों की सफाई से जुड़े कार्यों में बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए संबंधित नोडल अधिकारियों के संपर्क विवरण स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी दिया गया है। इससे नगरपालिकाओं और नगर निगमों के अधिकारियों, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों तथा मेडिकल कॉलेज प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद मिल सकती है। किसी अस्पताल में कचरा जमा होने, ड्रेनेज की समस्या या सफाई में कमी की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क कर आवश्यक कदम उठाने में यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
अस्पतालों की सफाई व्यवस्था पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों के बुनियादी ढांचे और साफ-सफाई को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आरजी कर मामले के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर आंदोलनकारी डॉक्टरों के एक वर्ग ने सवाल उठाए थे। हालांकि, अस्पतालों में सामान्य कचरा प्रबंधन का मुद्दा इन व्यापक विवादों से अलग है, लेकिन अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने की जरूरत लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
अस्पतालों में गंदगी से मरीजों के परिजनों को होती है परेशानी
अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को कई बार लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। ओपीडी, इमरजेंसी विभाग के बाहर और प्रतीक्षालयों में लोगों की भीड़ के कारण इन स्थानों पर नियमित सफाई और कचरे का समय पर निस्तारण बेहद जरूरी हो जाता है। विभिन्न अस्पतालों में कचरे के ढेर, परिसर में आवारा कुत्तों और अन्य जानवरों की आवाजाही तथा दीवारों और बरामदों पर पान-गुटखा की पीक के निशान जैसी समस्याओं की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना मरीजों और उनके परिजनों के लिए महत्वपूर्ण है।
अब निगरानी और कार्रवाई पर रहेगी नजर
स्वास्थ्य विभाग के इस पत्र के बाद अब यह देखना होगा कि राज्य की नगरपालिकाएं और नगर निगम अस्पतालों की सफाई व्यवस्था को लेकर कितनी तेजी से कदम उठाते हैं। कचरा संग्रह केंद्र बनाने, पर्याप्त डस्टबिन लगाने, नियमित रूप से कचरा उठाने और सड़कों तथा ड्रेनेज की मरम्मत जैसे प्रस्तावों को जमीन पर लागू करना अहम होगा। इसके साथ ही नियमित निगरानी और संबंधित अधिकारियों के बीच समन्वय भी जरूरी रहेगा।
अस्पतालों में इलाज के साथ मरीजों और उनके परिजनों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना भी जरूरी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का कितना असर पड़ता है और अस्पतालों में लंबे समय से सामने आ रही सफाई संबंधी शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी होता है, इस पर अब सभी की नजर रहेगी।