नई दिल्ली/वॉशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील को लेकर कूटनीतिक और आर्थिक हलचल तेज है। अमेरिकी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे Donald Trump और भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के बीच मजबूत व्यक्तिगत समीकरणों के बीच यह समझौता दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा दे सकता है। विशेषज्ञ इसे सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी का विस्तार मान रहे हैं।
व्यापार और निवेश: किसे कितना लाभ?
संभावित डील का केंद्र टैरिफ में राहत, सप्लाई चेन सहयोग और निवेश बढ़ाने पर है। भारत के आईटी, फार्मा, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिल सकती है। वहीं अमेरिका के लिए भारत एक विशाल उपभोक्ता बाजार और भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर के रूप में उभर रहा है। यदि टैरिफ बाधाएं कम होती हैं तो द्विपक्षीय व्यापार में तेज उछाल संभव है।
चीन फैक्टर और इंडो-पैसिफिक रणनीति
वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में भारत को एक स्थिर और लोकतांत्रिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है। यह डील आर्थिक के साथ-साथ सामरिक संतुलन का भी संकेत देती है, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में।
राजनीतिक संकेत और भविष्य की दिशा
ट्रंप और मोदी की केमिस्ट्री पहले भी बड़े आयोजनों में चर्चा का विषय रही है। संभावित ट्रेड समझौता यह दर्शाता है कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत-अमेरिका संबंध और प्रगाढ़ हो सकते हैं। आने वाले महीनों में आधिकारिक घोषणाएं इस दिशा को और स्पष्ट करेंगी।
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