मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल की है। जबकि कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी की हार के बाद से ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ की अध्यक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
राजधानी दिल्ली रवाना होने से पहले कमलनाथ ने मंगलवार को पार्टी के सभी हारे और जीते उम्मीदवारों के साथ बैठक की। भोपाल में प्रदेश कार्यालय में हार की समीक्षा की गई। कमलनाथ ने सभी प्रत्याशियों से वन टू वन चर्चा की। कमलनाथ ने कहा, 'मुझे कुछ विधायकों ने बताया कि उन्हें अपने गांव में 50 वोट मिले। यह कैसे हो सकता है। जिसको पहले से परिणाम पता था, उसने एग्जिट पोल बनवाया होगा। एग्जिट पोल तो माहौल बनाने के लिए था।
कांग्रेस नेताओं के ईवीएम हैक होने की बात पर बोले, 'सभी की बात सुन लूं, फिर किसी फैसले पर आना सही होगा। आप भी जानते हैं कि क्या माहौल था, मुझसे नहीं, पब्लिक से पूछिए। बैठक के बाद दिग्विजय सिंह ने ईवीएम को लेकर कहा, 'हमने बटन दबा दिया और पता ही नहीं चला कि वोट कहां गया है। अब वीवीपैट आई है, तो 7 सेकंड के लिए वोट किए दिए गया है, दिखाया जाता है। मूल बात यह है कि जिस मशीन में चिप लगी है, उसके हैक होने की संभावना होती है।'
चुनाव में कांग्रेस की इस वजह से भी हुई थी किरकिरी
सूत्रों के अनुसार, कमलनाथ को पद से हटाने की वजह मध्यप्रदेश में कांग्रेस की हार तो है ही। इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' को घटकों को लेकर उनके बयान की वजह से भी कांग्रेस आलाकमान कमलनाथ से नाराज है। चुनाव के दौरान कमलनाथ ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और जनता दल यूनाइटेड सुप्रीमो नीतीश कुमार सहित अन्य नेताओं के खिलाफ सीट बंटवारे को लेकर टिप्पणी की थी।
शिवराज सिंह से मुलाकात पर कमलनाथ की सफाई
मध्यप्रदेश में हार के बाद पीसीसी चीफ कमलनाथ और सांसद नकुलनाथ सीएम हाउस पहुंचे। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज को जीत की बधाई दी। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद कमलनाथ ने कहा, 'मुख्यमंत्री को बधाई दी। जब मैं मुख्यमंत्री बना था तो वह भी मुझे बधाई देने आए थे। मैंने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि हम विरोधी दल रहेंगे और प्रदेश के हित में जो सकेगा मदद करेंगे। आज प्रदेश में भयंकर समस्याएं, प्रदेश के सामने बहुत बड़ी चुनौती बेरोजगारी की है, प्रदेश में कृषि क्षेत्र की चुनौती है। प्रदेश की आर्थिक गतिविधि बनी रहने के लिए हमारा जो योगदान होगा हम जरूर देंगे।
नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष को लेकर उठापटक शुरू
मध्यप्रदेश में करारी हार के बाद कमलनाथ के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद के इस्तीफे की अटकलें शुरू हो गई हैं। प्रदेश कांग्रेस के साथ साथ नेता प्रतिपक्ष के नामों को लेकर भी उठापटक भी शुरू हो गई है। इस बार पार्टी ने दोनों ही पदों पर नए चेहरों को मौका दे सकती है। नेता प्रतिपक्ष के लिए चुरहट सीट विधायक अजय सिंह राहुल भैया, डिंडौरी विधानसभा से चौथी बार जीत दर्ज करने वाले कांग्रेस विधायक ओमकार मरकाम, श्योपुर जिले की विजयपुर से कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत, बड़वानी जिले की राजपुर सीट से विधायक बाला बच्चन, कसरावद सीट से कांग्रेस विधायक सचिन यादव, गंधवानी सीट से विधायक उमंग सिंगार को मौका दे सकती है। इसके अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कई नाम दौड़ में हैं। पार्टी इस बार किसी युवा चेहरे को मौका दे सकती है। इनमें दिग्विजय सिंह के बेटे राघौगढ़ सीट से जयवर्धन सिंह, पूर्व विधायक जीतू पटवारी, झाबुआ सीट से विधायक विक्रांत भूरिया जैसे नाम शामिल हैं।
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