पड़ोसी राज्य गुजरात की तर्ज पर प्रदेश में भी कई बार नशे से पीछा छुड़ाने के प्रयास हुए, लेकिन ये परवान नहीं चढ़ सके। पुरानी सरकार के अहाते बंद करने के जिस फैसले को बीते साल हाथों-हाथ लिया गया, वही फैसला अब एक बड़े वर्ग को परेशान करने लगा है। जो पहले अहातों में शराब पीते थे, उनमें से कई अब शराब दुकानों के सामने सड़कों, चौक-चौराहे व मोहल्लों में नशा कर रहे हैं। नई शराब नीति आने वाली है। राजस्व का बड़ा हिस्सा शराब से आ रहा है। बीते साल शराब से 13,900 करोड़ का राजस्व मिला। इस वित्तीय वर्ष में 15,900 करोड़ का अनुमान है।
पड़ोसी राज्य गुजरात की तर्ज पर प्रदेश में भी कई बार नशे से पीछा छुड़ाने के प्रयास हुए, लेकिन ये परवान नहीं चढ़ सके। पुरानी सरकार के अहाते बंद करने के जिस फैसले को बीते साल हाथों-हाथ लिया गया, वही फैसला अब एक बड़े वर्ग को परेशान करने लगा है।
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