cabinet meeting: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में कैबिनेट की 51वीं बैठक संपन्न हुई। जिसमे कुल 21 मुद्दो पर चर्चा की गई। बैठक में वैसे तो कई अहम निर्णय किए गए लेकिन सबसे महत्वपूर्ण और अहम निर्णय यह था कि अब प्रदेश सरकार केंद्र सरकार के इनकार के बावजूद पुरानी पेंशन योजना की राशि सभी अधिकारियों कर्मचारियों को खुद देगी। पुरानी पेंशन योजना की राशि राज्य सरकार द्वारा ही दिए जाने का यह निर्णय कैबिनेट की बैठक का सबसे अहम निर्णय रहा।
पुरानी पेंशन योजना की राशि दिए जाने को लेकर लगातार केंद्र सरकार से राज्य सरकार ने लंबे समय तक मांग की। बावजूद इस राशि को देने से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकार कर दिया जिसे देने का निर्णय अब राज्य सरकार ने किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अब ये निर्णय लिया गया है कि पुरानी पेंशन योजना की राशि का भुगतान अब प्रदेश की सरकार के द्वारा ही किया जाएगा।
बैठक के बाद इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे ने दी। राज्य के अधिकारियों कर्मचारियों के एनपीएस की राशि वापस करने के केंद्र सरकार की मनाही के बाद भी पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का निर्णय अब राज्य सरकार ने लिया है। बता दें कि कैबिनेट मंत्री रविंद्र चौबे ने यह भी जानकारी दी की कर्मचारियों को राज्य शासन संस्थान और उस पर अर्जित लाभांश जमा करने पर ही पुरानी पेंशन योजना की पात्रता दी जाएगी।
कैबिनेट में हुए इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर विपक्ष का बयान सामने आया
भाजपा मीडिया प्रभारी अमित चिमननी ने कहा, कांग्रेस पार्टी ओल्ड पेंशन स्कीम के नाम से केवल और केवल राजनीति कर रही है। सरकार को ये बताना चाहिए कि इस पेंशन को लागू करने से क्या मौजूदा वर्ष में सरकार पर कोई वित्तीय भार आ रहा है और अगर नहीं आ रहा है तो फिर अभी ये सब बाते करना राजनीति ही है यह प्रमाणित होता है। सरकार अपनी पुरानी घोषणाएं भूल कर रोज नई घोषणाएं करती है। भाजपा मीडिया प्रभारी अमित चंदानी ने कहा कि अगर कर्मचारियों के हित में वाकई राज्य सरकार को कोई फैसला करना है तो सबसे पहले महंगाई भत्ता केंद्र सरकार के बराबर करिए।
कुल मिलाकर 2023 चुनाव आने से पहले ही एक ओर जहां भाजपा बैठकों के माध्यम से और कार्यकर्ताओं को साध कर 2023 की तैयारियों में जुट गई हैं। तो वहीं दूसरी ओर नई नई घोषणाओं के माध्यम से राज्य सरकार भी कर्मचारियों अधिकारियों को खुश करने का बखूबी प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल राज्य सरकार के इस बड़े निर्णय से आखिरकार अधिकारी कर्मचारियों को कितना फायदा होता है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
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