पीथमपुर में जब से यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरा पहुंचा है। तब से यहां भारी बवाल देखने को मिल रहा है। भारी बवाल को देखते हुए को पुलिस-प्रशासन सख्ती पर उतर आया है। गलियों और मोहल्लों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। संयंत्र से सटे गांव तारपुरा के लोगों को चिह्नित कर उन्हें घरों में कैद कर दिया है। वहीं, आज जबलपुर हाईकोर्ट में मोहन सरकार कचरा भोपाल से पीथमपुर शिफ्ट करने के मामले में अब तक की प्रगति रिपोर्ट पेश करेगी।
दिसंबर माह में हुई थी सुनवाई
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने दिसंबर माह में हुई सुनवाई के दौरान यूनियन कार्बाइड परिसर का जहरीला कचरा एक माह में हटाने के निर्देश दिए थे। इस सिलसिले में एक सप्ताह में संयुक्त बैठक कर सभी औपचारिकताएं पूर्ण करने को कहा गया था। यह चेतावनी भी दी गई थी कि यदि कोई विभाग आदेश का पालन करने में विफल रहता है तो उसके प्रमुख सचिव के विरुद्ध अवमानना कार्रवाई की जाएगी। राज्य के मुख्य सचिव व भोपाल गैस त्रासदी राहत और पुनर्वास विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर स्पष्टीकरण देना होगा।
लिखकर दें नहीं होगा कोई नुकसान
एक याचिका नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भोपाल पीठ में भी दायर की गई है। इसमें प्रदेश के मुख्य सचिव से यह लिखित वादा लेने की गुहार लगाई गई कि वे यह लिखकर दें कि कचरा जलाने से पीथमपुर के लोगों को कोई नुकसान नहीं होगा। याचिकाकर्ता की तरफ से डिमांड की गई है कि सरकार को निर्देशित किया जाए कि वह कचरे को जलाने को लेकर जनता की चिंताओं को दूर करें। इसकी डिटेल जानकारी मीडिया में प्रकाशित करवाई जाए। इसके साथ ही याचिकाकर्ता की तरफ से राज्य सरकार के अधिकारियों से कचरे को जलाने से आस-पास के लोगों को कोई नुकसान नहीं होने का शपथ पत्र लेने का अनुराध किया गया है।
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