भाजपा के ग्वालियर शहर जिलाध्यक्ष के लिए विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दावेदारों के बीच खींचतान के बीच भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा बाजी मार ले गए। शर्मा ने अपने बेहद करीबी जयप्रकाश राजौरिया को ग्वालियर जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा दिया। मकर संक्रांति के मुहूर्त में देर रात राजौरिया का नाम घोषित किया गया। विरोध न हो, इसलिए प्रदेशाध्यक्ष शर्मा मंगलवार को सुबह ग्वालियर आए और सभी वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर राजौरिया के नाम पर सहमति बना ली। राजौरिया युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष और मप्र पाठ्य पुस्तक निगम के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश कार्य समिति सदस्य एवं भिंड के प्रभारी हैं।
प्रदेश अध्यक्ष शर्मा अड़े रहे राजौरिया पर
राजौरिया को जिलाध्यक्ष बनाने में प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा की पूरी भूमिका रही। वे हर मोर्चे पर उनके लिए अड़े रहे। वर्तमान जिलाध्यक्ष अभय चौधरी विधानसभा अध्यक्ष तोमर के करीबी थे। तोमर इस बार भी अपने करीबी रामेश्वर भदौरिया को जिलाध्यक्ष बनवाना चाहते थे। वहीं केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने पारस जैन और पूर्व संगठन मंत्री शैलेन्द्र बरूआ के नाम की सिफारिश की थी। जबकि प्रदेशाध्यक्ष शर्मा की ओर से राजौरिया का नाम था। इसलिए खींचतान चलती रही। भोपाल से नाम तय नहीं हो सका तो दिल्ली में भी चर्चा हुई, लेकिन वहां सहमति नहीं बनी। चर्चा है कि मुख्यमंत्री को बीच में आना पड़ा, उसके बाद नाम तय हुआ।
भाजपा के ग्वालियर शहर जिलाध्यक्ष के लिए विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के दावेदारों के बीच खींचतान के बीच भाजपा प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा बाजी मार ले गए। शर्मा ने अपने बेहद करीबी जयप्रकाश राजौरिया को ग्वालियर जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठा दिया।
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