देश में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच बागेश्वर महाराज का बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने साफ कहा कि सरकार की किसी भी नीति से समाज में विभाजन की भावना नहीं फैलनी चाहिए। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य जोड़ना होना चाहिए, तोड़ना नहीं।
“हम सब हिंदू एक हैं” का स्पष्ट संदेश
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हिंदू समाज में अगड़ा-पिछड़ा या ऊंच-नीच की सोच को बढ़ावा देना खतरनाक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “हम सब हिंदू एक हैं, कोई अगड़ा-पिछड़ा नहीं है।” उनका मानना है कि यदि नीतियां सामाजिक पहचान के आधार पर लोगों को अलग-अलग खांचों में बांटेंगी, तो इससे सामाजिक समरसता कमजोर होगी।
समानता बनाम भेदभाव का सवाल
UGC ने 2026 के लिए जो नई “समानता नियमावली” जारी की है, उसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना बताया जा रहा है। हालांकि, विरोध कर रहे छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों का आरोप है कि कुछ प्रावधान सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव पैदा कर सकते हैं। बागेश्वर महाराज ने इसी संदर्भ में कहा कि भारत में समानता होनी चाहिए, लेकिन समानता के नाम पर नया भेदभाव नहीं खड़ा किया जाना चाहिए।
छात्र आंदोलनों से गरमाया माहौल
उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में UGC के नए नियमों के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय जैसे कई कैंपसों में प्रदर्शन हुए हैं, जहां छात्रों ने आरोप लगाया कि नियमों की भाषा और प्रक्रिया एकतरफा है। बागेश्वर महाराज का बयान ऐसे समय आया है, जब यह मुद्दा केवल शैक्षणिक न रहकर सामाजिक और राजनीतिक रूप ले चुका है।
सरकार से जोड़ने की अपील
बागेश्वर महाराज ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह नीतियों के जरिए समाज को बांटने की बजाय जोड़ने का काम करे। उनके अनुसार भारत की ताकत उसकी एकता में है और शिक्षा नीति ऐसी होनी चाहिए, जो सभी वर्गों में विश्वास और समरसता पैदा करे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार से प्रार्थना है कि भारतीयों को बांटा न जाए, बल्कि एक सूत्र में पिरोया जाए।
धार्मिक नेतृत्व और सामाजिक विमर्श
इस बयान के साथ बागेश्वर महाराज ने यह संकेत दिया है कि धार्मिक नेतृत्व भी अब शिक्षा और नीति से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रख रहा है। उनका यह रुख UGC नियमों पर चल रही बहस को और व्यापक बना सकता है, जिसमें समानता, अधिकार और सामाजिक एकता जैसे प्रश्न केंद्र में हैं।
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