मध्यप्रदेश में विधानसभा का बजट सत्र खत्म होते ही प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव की तैयारी है। सरकार उन कलेक्टरों और कमिश्नरों को बदलने की योजना बना रही है जिनकी कार्यप्रदर्शन रिपोर्ट संतोषजनक नहीं मानी गई है। पहले यह प्रक्रिया मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद शुरू होनी थी, लेकिन अब तबादले विधानसभा के बजट सत्र (16 फरवरी से 6 मार्च) के बाद किए जाएंगे।
रिपोर्ट कार्ड के आधार पर होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों के पालन और मुख्य सचिव अनुराग जैन की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर आकलन किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने संबंधित रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसी आधार पर बदलाव की सूची तय की जा रही है।
अपर कलेक्टर और सचिव स्तर पर भी असर
सिर्फ कलेक्टर ही नहीं, बल्कि अपर कलेक्टर स्तर पर भी बदलाव संभव हैं। जिन अधिकारियों को एक ही जिले में ढाई साल से अधिक समय हो गया है, उन्हें भी स्थानांतरित किया जा सकता है। सचिव और प्रमुख सचिव स्तर पर भी नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से बढ़ी चुनौती
इस समय प्रदेश के 44 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं, जिनमें से 14 अधिकारी हाल के दो वर्षों में गए हैं। इससे राज्य में वरिष्ठ अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही है। कई अधिकारियों के पास एक से अधिक विभागों की जिम्मेदारी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
मंत्रालय से मैदान तक बदलाव
सूत्रों के मताबिक, बजट सत्र के बाद मंत्रालय से लेकर मैदानी प्रशासन तक व्यापक स्तर पर तबादले हो सकते हैं। इसे सरकार प्रशासनिक कसावट और जवाबदेही से जोड़कर देख रही है।
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