भारतीय वायुसेना की क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला ऐतिहासिक फैसला हाल ही में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने लिया है। 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी की मंजूरी देकर भारत ने न केवल अपनी वायु सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, बल्कि भविष्य की सामरिक चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयारियों को भी तेज कर दिया है। यह सौदा फ्रांस के साथ रणनीतिक रक्षा सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने का संकेत देता है।
फ्रांस से आएंगे 18 जेट, 96 विमानों का निर्माण होगा भारत में
इस मेगा डील की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि 18 राफेल लड़ाकू विमान सीधे फ्रांस से तैयार अवस्था में भारत लाए जाएंगे, जबकि शेष 96 जेट भारत में ही असेंबल और निर्मित किए जाएंगे। यह कदम न केवल घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूती देगा, बल्कि तकनीक हस्तांतरण और लगभग साठ प्रतिशत स्वदेशी सामग्री के उपयोग से भारत की आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगा। यह रक्षा उत्पादन को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाने की दिशा में निर्णायक पहल है।
वायुसेना की स्क्वाड्रन कमी होगी पूरी
वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल जेट मौजूद हैं, जिन्हें दो प्रमुख स्क्वाड्रनों में तैनात किया गया है। अपनी मारक क्षमता, उन्नत तकनीक और SCALP व Meteor जैसी मिसाइलों से लैस होने के कारण राफेल दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमानों की श्रेणी में गिना जाता है। 114 नए राफेल के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन कमी दूर होगी और पाकिस्तान तथा चीन दोनों मोर्चों पर भारत की आकाशीय शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी।
रणनीतिक लिहाज से क्यों अहम है यह डील
यह डील केवल नए विमानों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की दीर्घकालिक सामरिक तैयारी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। भविष्य के युद्धक्षेत्रों में एयर सुपीरियॉरिटी निर्णायक भूमिका निभाएगी और इस दृष्टि से राफेल की क्षमताएँ भारतीय वायुसेना को अत्यधिक बढ़त प्रदान करेंगी। यह डील भारत की रक्षा नीति को आधुनिक बनाने, हवाई बेड़े को मजबूत करने और बहु-स्तरीय खतरों का सामना करने की दिशा में मील का पत्थर है।
अब आगे क्या है प्रक्रिया में
रक्षा अधिग्रहण परिषद द्वारा AoN प्राप्त होने के बाद अब इस प्रस्ताव को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की स्वीकृति मिलनी शेष है। सीसीएस की मंजूरी के बाद भारत और फ्रांस के बीच आधिकारिक समझौते पर हस्ताक्षर होंगे, जिसके बाद निर्माण और आपूर्ति प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। अनुमान है कि यह प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ेगी ताकि आने वाले वर्षों में वायुसेना का बेड़ा और अधिक मजबूत होकर उभरे।
भारत की रक्षा क्षमता का नया अध्याय
114 राफेल जेट्स की मंजूरी न केवल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर भी है। यह निर्णय आने वाले समय में वायुसेना को वह शक्ति और उन्नत तकनीक देगा, जो किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में निर्णायक सिद्ध हो सकती है। मेक इन इंडिया और आधुनिक युद्धक क्षमता के इस संगम ने भारत की रक्षा कहानी में नया अध्याय जोड़ दिया है।
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