बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू राष्ट्र को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी धर्म विशेष को नीचा दिखाकर या अपशब्दों का प्रयोग करके हिंदू राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं है। उनके अनुसार हिंदू राष्ट्र की नींव नफरत नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र और कर्तव्यनिष्ठा से तैयार होती है।
सुधार आत्मचिंतन से शुरू होता है
पंडित शास्त्री ने कहा कि सनातन धर्म की वास्तविक शक्ति उसकी सहिष्णुता, समन्वय और आत्मचिंतन की क्षमता में है। उन्होंने स्वीकार किया कि समाज में कई कुरीतियां और सामाजिक कमजोरियां अभी भी मौजूद हैं, जिनका सुधार जरूरी है। उनके अनुसार “हमारे अंदर जो कमी है, उसे दूर करना ही हिंदू राष्ट्र की पहली शर्त है।” उन्होंने जात-पात जैसी विभाजनकारी प्रवृत्तियों को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि हम आपसी भेद मिटाकर एकजुट नहीं होंगे, तो राष्ट्र की परिकल्पना अधूरी ही रह जाएगी।
सनातन धर्म की मूल शिक्षा: जोड़ना, तोड़ना नहीं
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संदेश में जोर देकर कहा कि सनातन धर्म कभी भी किसी को गाली देना, अपमान करना या नफरत फैलाना नहीं सिखाता। उनका कहना है कि धर्म का असली उद्देश्य समाज को एकसूत्र में पिरोना है, न कि उसे विभाजित करना। यदि हम व्यवहार और भाषा दोनों में संयम नहीं रखेंगे, तो हमारी बात में प्रभाव भी नहीं रहेगा और सामाजिक संदेश भी कमजोर पड़ जाएगा।
मजबूत राष्ट्र की नींव—संस्कार, संस्कृति और चरित्र
उन्होंने कहा कि यदि देश को मजबूत बनाना है, तो सबसे पहले अपने आचरण, संस्कृति और जिम्मेदारी को मजबूत करना होगा। हिंदू राष्ट्र की अवधारणा केवल धार्मिक भावना का विषय नहीं है, बल्कि उसमें न्याय, समानता, कर्तव्य पालन और राष्ट्रनिष्ठा की भावना केंद्रीय भूमिका निभाती है। धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार वास्तविक हिंदू राष्ट्र वह है, जहां हर नागरिक को सम्मान मिले और हर धर्म का आदर हो।
सौहार्दपूर्ण संदेश से खुली व्यापक बहस
उनके इस बयान को समाज में भाईचारे और सौहार्द बढ़ाने वाले दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है। कई विशेषज्ञ इसे परिपक्व और संतुलित विचारधारा बताते हैं, जो धर्म को नफरत के बजाय जिम्मेदारी और सुधार का माध्यम मानती है। हालांकि, राजनीतिक स्तर पर इस बयान ने बहस भी छेड़ दी है, लेकिन व्यापक रूप से इसे सकारात्मक दिशा की पहल माना जा रहा है।
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