मध्य प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार है। गृह विभाग की जिम्मेदारी स्वयं मुख्यमंत्री के पास है, जिले के एसपी और कलेक्टर सीधे सरकार के संपर्क में माने जाते हैं—इसके बावजूद मऊगंज से उठ रहा एक सवाल अब आम जनता से लेकर सियासी गलियारों तक गूंजने लगा है। आखिर मऊगंज के भाजपा विधायक प्रदीप पटेल पिछले 20 दिनों से सार्वजनिक रूप से कहां हैं? जो विधायक कभी दबंग फैसलों, बेखौफ गश्त और मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने के लिए पहचाने जाते थे, वही आज न तो जनता के बीच दिख रहे हैं और न ही अपने ही क्षेत्र में सक्रिय नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि विधायक के घर और कार्यालय में ताले लटके हैं, फोन बंद हैं, सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है और भोपाल में किसी गुप्त ठिकाने पर उनके होने की चर्चाएं जोरों पर हैं। पूरा मामला 3 जनवरी को उस वक्त सामने आया जब रीवा–बनारस नेशनल हाईवे से लगी एक विवादित भूमि पर विधायक की मौजूदगी को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। विवाद बढ़ने पर विधायक को मौके से हटना पड़ा। अगले दिन दिए गए बयान में विधायक ने खुद को दोनों पक्षों के साथ बताते हुए न्यायालय के फैसले को स्वीकार करने की बात कही थी। उस वक्त तक किसी भय या खतरे की बात सामने नहीं आई थी। लेकिन भोपाल पहुंचते ही हालात पूरी तरह बदलते नजर आए। सार्वजनिक गतिविधियां ठप हो गईं, संपर्क टूट गया और एक इंटरव्यू में विधायक द्वारा परिवार को घर से बाहर न निकलने और सीसीटीवी चालू रखने की सलाह ने जनता को और भी हैरान कर दिया। सवाल उठ रहा है कि जब मऊगंज सामान्य है, लोग बेखौफ घूम रहे हैं, प्रशासन कार्रवाई की बात कर रहा है—तो फिर विधायक किससे और क्यों डर रहे हैं? यही सवाल आज मऊगंज की गलियों से निकलकर पूरे जिले की राजनीति को झकझोर रहा है
भाजपा की डबल इंजन सरकार में भी असुरक्षित क्यों महसूस कर रहे मऊगंज विधायक?
मध्य प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार होने के बावजूद मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल 20 दिनों से लापता हैं। घर-कार्यालय बंद, फोन बंद और डर की चर्चाओं ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है।
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