सिरपुर झील को रामसर साइट का दर्जा इसलिए दिया गया था क्योंकि यह न सिर्फ जलीय जैव विविधता का अनूठा केंद्र है, बल्कि प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना भी है। यह क्षेत्र प्राकृतिक जल संरचना और पारिस्थितिक संवेदनशीलता के कारण विशेष संरक्षण की श्रेणी में आता है। लेकिन हाल के वर्षों में इसमें बढ़ते मानव हस्तक्षेप और औद्योगिक गतिविधियों का प्रभाव साफ तौर पर दिखाई देने लगा है, जिससे इस संरक्षण क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान खतरे में पड़ गई है।
औद्योगिक अपशिष्ट का सीधा असर और बढ़ता प्रदूषण
सिरपुर के आसपास स्थित औद्योगिक इकाइयों द्वारा बगैर उचित शोधन के अपशिष्ट जल का नालों के माध्यम से झील में पहुंचना सबसे बड़ा संकट बन गया है। दूषित रसायनों से युक्त पानी में भारी धातुएं, विषैले तत्व और माइक्रोप्लास्टिक पाए जा रहे हैं, जो न केवल पानी की गुणवत्ता को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि जलीय वनस्पतियों और मछलियों के प्रजनन चक्र को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं। यह प्रदूषण सतत रूप से बढ़ रहा है और अब झील की आत्मशुद्धिकरण क्षमता भी कमजोर पड़ने लगी है।
जलीय जीवों की घटती संख्या और पारिस्थितिक असंतुलन
दूषित पानी के निरंतर प्रवाह ने कई जलीय प्रजातियों के अस्तित्व पर सीधा खतरा खड़ा कर दिया है। मछलियों की कई प्रजातियों में मृत्यु दर बढ़ी है और कुछ संवेदनशील जीव झील से लगभग गायब होने लगे हैं। रासायनिक प्रदूषण के कारण पानी में ऑक्सीजन स्तर तेजी से गिरता है, जिससे मछलियों, घोंघों और अन्य सूक्ष्मजीवों के लिए जीवित रहना मुश्किल होता जा रहा है। जलकुंभी और अन्य आक्रामक प्रजातियों का अनियंत्रित विस्तार पारिस्थितिकी तंत्र पर अतिरिक्त भार डाल रहा है।
प्रवासी पक्षियों पर खतरा और पर्यावरणीय संकेत
सिरपुर झील हर साल हजारों प्रवासी पक्षियों का मौसमीय घर होती है, लेकिन प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने उनकी संख्या को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दूषित जल और घटती मछली आबादी के कारण पक्षियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता, जिसके कारण वे वैकल्पिक स्थानों की तलाश में मजबूर हो सकते हैं। पक्षियों के व्यवहार में आया यह बदलाव पूरे पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक चेतावनी है, जिसे समय रहते समझना बेहद जरूरी है।
समाधान की दिशा में कदम और जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि सिरपुर झील को बचाने के लिए उद्योगों पर सख्त निगरानी, अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों के अनिवार्य उपयोग और अवैध नालों की पहचान कर उन्हें बंद करना सबसे पहला कदम होना चाहिए। स्थानीय प्रशासन, पर्यावरण विभाग और नागरिक समाज मिलकर यदि संरक्षण की दिशा में कार्य करें, तो इस महत्वपूर्ण रामसर साइट को फिर से स्वस्थ पारिस्थितिकी की ओर ले जाया जा सकता है। यह केवल एक झील की रक्षा का प्रश्न नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के पर्यावरणीय भविष्य का भी मुद्दा है।
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