मध्यप्रदेश में शीतलहर और ठंडक के बीच अब मौसम एक नया मोड़ ले रहा है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के मजबूत सक्रिय होने से शनिवार रात से बादल घिरने लगेंगे और कई जिलों में हल्की बारिश की शुरुआत हो सकती है। यह बदलाव अचानक जरूर है, लेकिन इससे प्रदेश के तापमान में गिरावट रुक सकती है और ठंड से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस सिस्टम का प्रभाव अगले 48 से 72 घंटे तक बना रह सकता है, जिसके चलते लगातार बादल और छिटपुट बारिश की स्थिति बनी रहेगी।
रविवार और सोमवार को सबसे ज्यादा असर दिखेगा
विभाग की ताजा भविष्यवाणी के अनुसार रविवार और सोमवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। यह बरसात ठंड तो कम करेगी ही, साथ ही मौसम में नमी भी बढ़ाएगी। कई स्थानों पर बादलों की वजह से धूप नहीं निकलने से दिन के तापमान में गिरावट और रात के तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है।
मौसम को प्रभावित करने वाले सिस्टम सक्रिय
मौसम विभाग ने साफ किया है कि बारिश का यह दौर दो बड़े सिस्टम्स के कारण सक्रिय हुआ है। पहला—पूर्वोत्तर असम पर हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात, और दूसरा—ईरान के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र पर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ। ये दोनों तंत्र मिलकर मध्य भारत की ओर नम हवा ला रहे हैं। इसके अलावा 2 फरवरी यानि सोमवार को एक और नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है, जिससे बारिश का दायरा और बढ़ सकता है। इससे मध्यप्रदेश के कई जिलों में बादलों की आवक और वर्षा की मात्रा बढ़ने की संभावना है।
ठंड से राहत और फसलों को फायदा
कड़ाके की ठंड और शुष्क हवा से परेशान लोगों के लिए यह बारिश राहत लेकर आएगी। बादल छाने और बूंदाबांदी के कारण तेज़ सर्द हवाओं का असर कम होगा और न्यूनतम तापमान बढ़ सकता है। वहीं किसानों के लिए यह वर्षा अच्छी खबर लेकर आई है। गेहूं, चने, सरसों और अन्य रबी फसलों को हल्की बारिश बेहद लाभ पहुंचाती है, क्योंकि इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और फसल की वृद्धि बेहतर होती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह बारिश फसलों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी और पैदावार में सुधार ला सकती है।
अगले 48 घंटे रहेंगे सबसे महत्वपूर्ण
विभाग ने सलाह दी है कि लोग अगले दो दिनों तक मौसम की अपडेट लेते रहें। पहाड़ी और खुले इलाकों में तेज़ हवा के साथ हल्की बारिश का प्रभाव अधिक हो सकता है। किसानों को फसल कटाई से पहले मौसम का पूर्वानुमान देखने और आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। यह बारिश जहां सामान्य जीवन में हल्का बदलाव ला सकती है, वहीं मौसम को अधिक संतुलित भी करेगी।
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