मध्यप्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और एडीजी राजा बाबू सिंह के एक बयान ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। मदरसों में कुरान के साथ भगवद गीता पढ़ाने की उनकी सलाह को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाज़ी शुरू हो गई है। यह मुद्दा अब केवल सियासत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम जनता और शिक्षाविदों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है।
ADG राजा बाबू सिंह का बयान
सीहोर जिले के दोहरा स्थित मदरसा इस्लामिया मदीनतुल उलूम के छात्रों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत करते हुए एडीजी राजा बाबू सिंह ने कहा कि जिस तरह कुरान इंसान को सही रास्ता दिखाती है, उसी तरह भगवद गीता भी जीवन मूल्यों, कर्तव्य और नैतिकता की शिक्षा देती है। उन्होंने सुझाव दिया कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ गीता जैसे ग्रंथों का भी अध्ययन कराया जाना चाहिए।
मदरसा संचालक का पक्ष
मदरसा संचालक अमीन उल्लाह ने इस मुद्दे पर संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ज्ञान किसी एक धर्म की सीमा में बंधा नहीं होता। जिस ग्रंथ से समाज और देश को आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिले, उसका अध्ययन किया जाना चाहिए। अगर भगवद गीता से सकारात्मक संदेश मिलता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। व्यक्तिगत रूप से पहले मैं स्वयं गीता पढ़ूंगा, उसके बाद ही बच्चों को पढ़ाने पर फैसला करूंगा,
बयान को लेकर बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने
एडीजी के बयान को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। बीजेपी ने इस सुझाव का खुलकर समर्थन किया है। बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि भगवद गीता मानवता और जीवन मूल्यों का सबसे बड़ा ग्रंथ है। गीता से आत्मबल मिलता है, सामाजिक समरसता की सीख मिलती है और अन्याय व अपराध के खिलाफ लड़ने की प्रेरणा मिलती है। जब मदरसों में हिंदू बच्चों को उर्दू पढ़ाई जा सकती है, तो गीता पढ़ाने में आपत्ति क्यों? गीता सबको पढ़नी चाहिए और पढ़ानी भी चाहिए,
कानून-व्यवस्था पर ध्यान दें -कांग्रेस
वहीं कांग्रेस ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज़ जताया है। कांग्रेस नेता अब्बास हफीज ने कहा कि एडीजी को इस तरह के बयानों के बजाय कानून-व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। प्रदेश में हत्या, लूट और अपराध की घटनाएं हो रही हैं और एडीजी साहब को यह चिंता है कि मदरसों में गीता पढ़ाई जाए या नहीं। मदरसों में शिक्षा देने का काम मौलानाओं का है और वे इसे अच्छी तरह कर रहे हैं। एडीजी को बीजेपी नेताओं की तरह बयानबाज़ी करने से बचना चाहिए