रायपुर। कांग्रेस पार्टी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कमजोर किए जाने के आरोप लगाते हुए देशभर में ‘मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान’ की शुरुआत की है। पार्टी का कहना है कि केंद्र की भाजपा सरकार लगातार बजट में कटौती कर और भुगतान में देरी कर इस महत्वाकांक्षी योजना को खत्म करने की साजिश कर रही है।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मनरेगा ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और किसानों के लिए जीवनरेखा साबित हुआ है, लेकिन मौजूदा सरकार इसकी मूल भावना के खिलाफ काम कर रही है। पार्टी के अनुसार समय पर मजदूरी न मिलना, जॉब कार्ड रद्द करना और काम के दिनों में कटौती जैसे कदम मजदूरों को मजबूरी में पलायन के लिए धकेल रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा कि मनरेगा कांग्रेस की देन है और इसे बचाने के लिए पार्टी सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष कर रही है। मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत गांव-गांव जनजागरण, धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम चल रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ में आज कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज मनरेगा को बचाने सड़क पर पदयात्रा करेंगे, पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा का बजट बढ़ाया जाए, लंबित मजदूरी का तुरंत भुगतान किया जाए और काम के न्यूनतम 100 दिनों की गारंटी को सख्ती से लागू किया जाए। कांग्रेस ने यह भी चेतावनी दी कि अगर सरकार ने मनरेगा को कमजोर करना बंद नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कांग्रेस का दावा है कि यह अभियान केवल एक राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई है।
भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा ने कांग्रेस के आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए केंद्र सरकार की योजनाओं को मजदूर और किसानों के हित में ऐतिहासिक करार दिया। भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संसद के दोनों सदनों से पारित ‘विकसित भारत जी राम जी’ बिल ग्रामीण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह बिल मजदूरों और किसानों के जीवन में स्थायित्व और पारदर्शिता लाने वाला है। उन्होंने बताया कि जहां पहले मनरेगा के तहत केवल 100 दिनों की मजदूरी की गारंटी थी, वहीं अब ‘विकसित भारत जी राम जी’ के अंतर्गत 125 दिनों की मजदूरी की गारंटी दी गई है। इतना ही नहीं, मजदूरी का भुगतान अब 7 दिनों के भीतर अनिवार्य होगा। यदि भुगतान में देरी होती है तो मजदूरों को ब्याज सहित भुगतान करने का प्रावधान भी किया गया है। राहुल टिकरिहा ने आरोप लगाया कि पूर्व में मनरेगा के तहत व्यापक भ्रष्टाचार हुआ। कई स्थानों पर मजदूरों को वर्षों तक मजदूरी नहीं मिली। उन्होंने पश्चिम बंगाल के 19 जिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां काम तो कराया गया लेकिन मजदूरों को भुगतान नहीं हुआ। नई व्यवस्था में ऐसी लापरवाही संभव नहीं होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि खेती-किसानी के सीजन में कृषि कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए 60 दिनों की छूट का प्रावधान रखा गया है, ताकि किसान मजदूरी और कृषि कार्य में संतुलन बना सकें।
भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पहले मनरेगा के अंतर्गत केवल गड्ढा खुदाई जैसे अस्थायी कार्य होते थे, जो बारिश में समाप्त हो जाते थे। लेकिन अब ग्राम पंचायतों को अधिकार दिया गया है कि वे गांव की वास्तविक जरूरतों के अनुसार स्कूल भवन, आंगनबाड़ी, सामुदायिक भवन, सड़क, नाली निर्माण जैसे स्थायी विकास कार्य करा सकें। भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। बायोमेट्रिक प्रणाली और एआई आधारित मॉनिटरिंग से पूरी योजना की निगरानी की जाएगी, जिससे मजदूरी किसी भी हाल में भ्रष्टाचार की भेंट न चढ़े।
राहुल टिकरिहा ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष जनता को भ्रमित कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि मोदी सरकार मजदूरों और किसानों के हितों की वास्तविक संरक्षक है। उन्होंने कांग्रेस को किसान और मजदूर विरोधी करार देते हुए कहा कि जनता अब सच समझ चुकी है।
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