मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण देने से जुड़े मामलों की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोई वकील उपस्थित नहीं था। ओबीसी वर्ग के अधिवक्ताओं के अनुरोध पर अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को होगी।
6 वरिष्ठ वकील नियुक्त, फिर भी सरकार अनुपस्थित
राज्य सरकार ने इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित कुल 6 वरिष्ठ अधिवक्ताओं को नियुक्त किया था। इसके बावजूद, सीरियल नंबर 106 पर सूचीबद्ध मामले की सुनवाई के दौरान कोई भी सरकारी वकील उपस्थित नहीं रहा। ओबीसी पक्ष के अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर सुनवाई से बच रही है और बार-बार तारीखें लेकर मामले को लंबित रख रही है।
13% पद रोक, न हाईकोर्ट स्टे न सुप्रीम कोर्ट रोक
ओबीसी वर्ग के वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप चौधरी और रामेश्वर सिंह ठाकुर ने अदालत को बताया कि 27% आरक्षण कानून पर न तो हाईकोर्ट का स्टे है और न ही सुप्रीम कोर्ट की कोई रोक। इसके बावजूद, राज्य सरकार भर्तियों में केवल 13% पद आरक्षित कर रही है, जिससे ओबीसी युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने पहले सभी मामलों को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कराया, लेकिन सुनवाई के समय महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उनकी टीम की अनुपस्थिति सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करती है।
ओबीसी महासभा ने आंदोलन का ऐलान
ओबीसी महासभा के लोकेंद्र गुर्जर ने कहा कि अब केवल अदालत की तारीखों का इंतजार नहीं किया जाएगा। संगठन जल्द ही एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा और तारीख़ सार्वजनिक करेगा।
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