पन्ना जिले की ग्राम पंचायत दिया में करोड़ों रुपये की लागत से कराए गए निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद शुरू हुई जांच अब सवालों के घेरे में है। एक सप्ताह में पूरी होनी थी जांच, लेकिन एक माह बीत जाने के बावजूद न तो रिपोर्ट तैयार हो सकी और न ही सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। दस्तावेजों के गायब होने से पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और अधिकारियों की संभावित मिलीभगत को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गया है, जिससे आम जनता के कर के पैसों के दुरुपयोग की आशंका और गहरी हो गई है।
एक हफ्ते में पूरी होनी थी जांच, एक माह बाद भी अधूरी
पन्ना जिले की ग्राम पंचायत दिया में करोड़ों रुपये की लागत से कराए गए निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की जांच एक सप्ताह में पूरी होनी थी, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी जांच अधर में लटकी हुई है। ग्रामीणों की शिकायत पर जनपद पंचायत पन्ना द्वारा 29 दिसंबर 2025 को तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया गया था, जिसमें सहायक यंत्री, उपयंत्री एवं पंचायत समन्वय अधिकारी को मौके पर जाकर 7 दिवस में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
जांच शुरू होते ही गायब हुए दस्तावेज, संदेह गहराया
जांच जैसे ही शुरू हुई, वैसे ही ग्राम पंचायत से कई महत्वपूर्ण वैधानिक दस्तावेज गायब हो गए। आरोप है कि सरपंच और सचिव ने भ्रष्टाचार उजागर होने के डर से मांगे गए रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए। इससे न केवल जांच प्रभावित हो रही है, बल्कि यह भी सवाल उठता है कि 👉 क्या दस्तावेज जानबूझकर गायब किए गए? 👉 या फिर किसी बड़े घोटाले को दबाने की कोशिश हो रही है?
सहायक यंत्री का बयान: दस्तावेज नहीं मिल रहे
इस संबंध में जब जांच अधिकारी एवं पन्ना जनपद पंचायत के सहायक यंत्री प्रशांत नायक से चर्चा की गई, तो उन्होंने बताया कि अधिकांश निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर लिया गया है, लेकिन कुछ कार्यों से जुड़े दस्तावेज ग्राम पंचायत द्वारा उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। बार-बार मांग के बावजूद दस्तावेज न मिलने के कारण पूरी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करना संभव नहीं हो पा रहा है। साथ ही जिन निर्माण कार्यों में कमी पाई गई है, उन्हें दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बड़ा सवाल: लापरवाही या मिलीभगत?
जांच के दौरान दस्तावेजों का गायब होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इससे यह आशंका भी गहराती जा रही है कि कहीं ग्राम पंचायत में हुई लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं को दबाने के लिए अधिकारियों की मिलीभगत तो नहीं है। यदि निष्पक्ष जांच हुई, तो यह मामला जिला पंचायत और जनपद पंचायत स्तर तक फैले भ्रष्टाचार की परतें खोल सकता है।
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