पन्ना जिले के गहरा स्थित शासकीय स्कूल में मिड डे मील योजना की गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां नौनिहालों को जंग लगी और गंदी थालियों में घटिया गुणवत्ता का भोजन परोसा जा रहा है। स्कूल में पानी की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चे खुद थालियां धोने को मजबूर हैं। यह मामला न केवल मिड डे मील की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और सरकारी निगरानी व्यवस्था की पोल भी खोलता है।
पन्ना के गहरा स्कूल में नौनिहालों के स्वास्थ्य से खुला खिलवाड़
पन्ना। मध्य प्रदेश सरकार की बहुप्रचारित मिड डे मील योजना पन्ना जिले में किस हालत में चल रही है, इसकी बानगी ग्राम पंचायत गहरा के शासकीय स्कूल में साफ देखी जा सकती है। यहां बच्चों को जंग लगी, गंदी और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक थालियों में भोजन परोसा जा रहा है। सवाल यह नहीं है कि गलती किसकी है, सवाल यह है कि यह लापरवाही अब तक चल कैसे रही है?
शिक्षा का मंदिर या लापरवाही का अड्डा? न पानी, न स्वच्छता, न जवाबदेही
जिस स्कूल में बच्चों का भविष्य संवारा जाना चाहिए, उसी स्कूल में पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक नदारद है। स्थिति यह है कि पीने का पानी भी मुश्किल से जुटाया जाता है, जबकि बर्तनों की सफाई की तो कोई व्यवस्था ही नहीं। नतीजा— 👉 छोटे-छोटे बच्चे खुद जंग लगी थालियां धोने को मजबूर हैं। 👉 स्वच्छता के सभी नियम कागजों तक सीमित रह गए हैं। क्या यह बाल श्रम की श्रेणी में नहीं आता? क्या शिक्षा विभाग और पंचायत प्रशासन को इसकी कोई जानकारी नहीं?
पोषण योजना या सिर्फ दिखावा? पानी में तैरते आलू, पोषण शून्य भोजन
मिड डे मील का उद्देश्य बच्चों को पोषणयुक्त भोजन देना है, लेकिन गहरा स्कूल में यह योजना केवल नाम मात्र की रह गई है। स्थानीय लोगों और बच्चों के अनुसार— मीनू के अनुसार नियमित भोजन नहीं बनता सब्जी के नाम पर पानी में तैरते आलू परोसे जाते हैं दाल-सब्जी में न स्वाद, न पोषण यह भोजन नहीं, बल्कि नौनिहालों के स्वास्थ्य के साथ प्रयोग है।
डेढ़ साल से व्यवस्था ठप फिर भी जांच और कार्रवाई शून्य
विद्यालय के प्रभारी शिक्षक दयाशंकर लखेरा का बयान व्यवस्था की पोल खोल देता है। उनके अनुसार— “पिछले डेढ़ साल से स्कूल में पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। किसी तरह एक-दो बाल्टी पानी लाकर काम चलाया जाता है।” सवाल उठता है— ❓ डेढ़ साल में किसी निरीक्षण अधिकारी की नजर इस स्कूल पर क्यों नहीं पड़ी? ❓ मिड डे मील की मॉनिटरिंग रिपोर्ट में सब कुछ ठीक कैसे दर्ज होता रहा?
प्रशासन जागा, पर देर से अब टेंडर की बात, तब तक क्या?
जिला परियोजना समन्वयक अजय गुप्ता ने स्वीकार किया कि थालियां पुरानी हैं और नई थालियों के लिए टेंडर प्रक्रिया में है। साथ ही हैंडपंप सुधार के लिए पीएचई से बात करने की बात कही गई है। लेकिन बड़ा सवाल यही है— टेंडर पूरा होने तक बच्चे क्या खाएंगे? जंग लगी थालियों में ही?
अंतिम सवाल जिम्मेदारी तय होगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में?
यह मामला सिर्फ गहरा स्कूल का नहीं, बल्कि पूरे पन्ना जिले में मिड डे मील योजना की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल है। अगर समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही किसी बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है। अब देखना यह है कि— 🔴 प्रशासन सिर्फ बयान देगा या 🔴 दोषियों पर ठोस कार्रवाई भी होगी?
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