पन्ना जिले के एक सरकारी स्कूल में गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला मामला सामने आया है। स्कूल परिसर में अंधविश्वास से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले पर कलेक्टर ऊषा परमार ने जांच के संकेत दिए हैं।
वीडियो वायरल, कलेक्टर ऊषा परमार ने जांच के दिए संकेत
एक ओर देश 21वीं सदी में विज्ञान, तकनीक और वैज्ञानिक सोच के सहारे विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, वहीं बुंदेलखंड के पन्ना जिले से सामने आई एक घटना ने सामाजिक सोच और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला ग्राम कोनी स्थित शासकीय माध्यमिक शाला का है, जहां गणतंत्र दिवस जैसे गरिमामयी राष्ट्रीय पर्व पर राष्ट्रीय ध्वज की मर्यादा को ताक पर रखकर खुलेआम अंधविश्वास का प्रदर्शन किया गया।
झंडा वंदन के बाद स्कूल बना अंधविश्वास का मंच
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि झंडा वंदन के तुरंत बाद स्कूल परिसर में एक व्यक्ति अगरबत्ती के धुएं और हवन की आग के बीच तथाकथित रूप से ‘भाव’ खेलता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय पर्व की गरिमा और मर्यादा को दरकिनार करते हुए विद्यालय परिसर को धार्मिक अनुष्ठान का रूप दे दिया गया, जो नियमों और संवैधानिक मूल्यों के प्रतिकूल है।
सरपंच व शिक्षक बने मूकदर्शक
सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ग्राम सरपंच और स्कूल के शिक्षक मौके पर मौजूद होने के बावजूद मूकदर्शक बने रहे। किसी ने भी इस अंधविश्वासपूर्ण गतिविधि को रोकने या आपत्ति जताने का प्रयास नहीं किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं, महिलाएं और ग्रामीण मौजूद थे, जिन पर इसका नकारात्मक और भ्रामक प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।
कलेक्टर ऊषा परमार का बयान—जांच होगी, जागरूकता जरूरी
शिक्षा के मंदिर में, जहां बच्चों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्क और विवेक सिखाया जाना चाहिए, वहां इस प्रकार की गतिविधियां उनके मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं। मामले को लेकर पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार ने कहा कि यह घटना उनके संज्ञान में आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की जांच कराई जाएगी और लोगों को जागरूक किया जाएगा, ताकि भविष्य में राष्ट्रीय ध्वज के नीचे इस तरह की गतिविधियों की पुनरावृत्ति न हो।
Comments (0)