पुणे. मराठी अभिनेत्री और लावणी कलाकार मधु कंबिकर का 12 अक्टूबर को 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। महाराष्ट्र निदेशालय सामान्य सूचना और जनसंपर्क यानी एमडीजीपीआईआर ने उनके निधन की पुष्टि की। प्रेस नोट में कहा गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार कलाकार कुछ समय से अज्ञात बीमारी से जूझ रही थीं। लंबे समय तक संघर्ष के बाद उनका निधन हुआ। मराठी लोक कला जगत में यह एक बड़ी क्षति मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री का शोक संदेश
एमडीजीपीआईआर ने एक्स पर पोस्ट कर मधु कंबिकर के निधन की जानकारी दी। इसमें लिखा गया कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वरिष्ठ अभिनेत्री मधु कंबिकर के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अभिनय और बहुआयामी प्रदर्शनों के माध्यम से महाराष्ट्र की लोक कलाओं की विरासत को संजोते हुए रजत पट पर अपनी पहचान बनाई। मुख्यमंत्री ने कंबिकर परिवार और प्रशंसकों के दुख में शामिल होते हुए ईश्वर से सभी को इस नुकसान को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। शोक संदेश में उनकी कला यात्रा को याद किया गया।
लोक कलाओं से सिनेमा तक का सफर
मधु कंबिकर की कला यात्रा लोक कलाओं और रंगमंच से शुरू होकर सिनेमा की दुनिया तक पहुंची। उन्होंने लोक कलाओं में पारंपरिक लावणी शैली को संजोया। कथक के अध्ययन के माध्यम से उन्होंने नृत्यांगना के रूप में भी प्रशंसा अर्जित की। रजत पट पर मराठी लोक कलाओं का झंडा बुलंद रखने वाली बहुमुखी प्रतिभा अब नहीं रहीं। उनकी कला ने महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती दी। कई दशकों तक उन्होंने मंच और पर्दे पर अपनी छाप छोड़ी।
लावणी और कथक में योगदान
लावणी महाराष्ट्र की पारंपरिक लोक कला है जिसे मधु कंबिकर ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत रखा। उन्होंने इस शैली को आधुनिक मंच पर भी प्रस्तुत किया। कथक नृत्य के अध्ययन ने उनकी कला को और गहराई दी। नृत्यांगना के रूप में उन्होंने दर्शकों का दिल जीता। सिनेमा में भी उन्होंने लोक कलाओं के तत्वों को शामिल कर अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी बहुआयामी प्रतिभा ने कला जगत में उन्हें विशेष स्थान दिलाया।
परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कंबिकर परिवार और मधु ताई के प्रशंसकों के दुख में शामिल होने की बात कही। उन्होंने ईश्वर से सभी को इस क्षति को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। कला जगत में उनके निधन से शोक की लहर है। मराठी सिनेमा और लोक कला से जुड़े लोग उनकी यादों को संजो रहे हैं। उनकी कला यात्रा को सदैव याद रखा जाएगा। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।