कोलकाता डेस्क: रोज की थाली में दाल, चावल, रोटी, सब्जी और दूध जैसी चीजें शामिल होने के बावजूद देश की बड़ी आबादी अपनी प्रोटीन की जरूरत पूरी नहीं कर पा रही है। द स्टेट ऑफ प्रोटीन एंड फाइबर इन अर्बन इंडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 73 फीसदी लोगों के रोजाना के भोजन में पर्याप्त प्रोटीन नहीं पहुंच रहा है। रिपोर्ट में शहरों और गांवों के खानपान के साथ-साथ छोटे बच्चों के पोषण से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों के विकास, कोशिकाओं की मरम्मत और सामान्य शारीरिक कार्यों के लिए जरूरी है। ऐसे में भोजन में प्रोटीन की कमी लंबे समय तक स्वास्थ्य और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती है। रिपोर्ट में प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की कीमत और उनकी उपलब्धता को भी कम खपत की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है।
5 बड़े शहरों में की गई स्टडी
प्रोटीन और फाइबर की खपत को समझने के लिए यह अध्ययन पेप्सिको इंडिया और यूरोमॉनिटर इंटरनेशनल ने भारतीय बाजरा अनुसंधान संस्थान (IIMR) के सहयोग से किया। इसके लिए दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता और कोच्चि जैसे पांच बड़े शहरों को शामिल किया गया। अध्ययन में लोगों की रोजाना की डाइट, प्रोटीन की खपत और खानपान से जुड़ी आदतों का आकलन किया गया। इसका उद्देश्य यह समझना था कि सामान्य भोजन के बावजूद लोगों को पर्याप्त पोषण क्यों नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि भोजन में कैलोरी और पेट भरने वाली चीजें शामिल होना ही पर्याप्त नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए भोजन में जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन भी होना चाहिए। हालांकि, अध्ययन में शामिल शहरों के आंकड़ों को पूरे देश की आबादी का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि मानने से पहले इसके सर्वे की पद्धति और दायरे को समझना जरूरी है।
शहरों में 44 फीसदी लोग पूरी नहीं कर पा रहे प्रोटीन की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, शहरों में करीब 44 फीसदी और गांवों में 36 फीसदी लोग अपनी रोजाना की प्रोटीन जरूरत पूरी नहीं कर पा रहे हैं। शहरी आबादी में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की पाई गई, जिन्हें प्रतिदिन 41 ग्राम से कम प्रोटीन मिल रहा था। यह स्थिति बताती है कि नियमित भोजन करने के बावजूद लोगों की डाइट में पोषण संबंधी कमी रह सकती है। कई बार लोग पेट भरने के लिए चावल, रोटी और अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन तो करते हैं, लेकिन प्रोटीन के पर्याप्त स्रोत शामिल नहीं कर पाते। इसके अलावा, व्यस्त जीवनशैली और खानपान की बदलती आदतें भी भोजन के पोषण संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों की कीमत और उनकी आसानी से उपलब्धता भी इस समस्या से जुड़ी हुई हैं। इसलिए प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ किफायती विकल्पों तक पहुंच सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
महंगे प्रोटीन फूड और उपलब्धता की कमी बड़ी वजह
रिपोर्ट में प्रोटीन की कम खपत के पीछे आर्थिक और व्यावहारिक कारणों को भी सामने रखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 60 फीसदी लोगों ने प्रोटीन वाले खाद्य उत्पादों को महंगा बताया। वहीं, 57 फीसदी लोगों ने आसानी से उपलब्ध होने वाले सुविधाजनक विकल्पों की कमी को इसकी एक वजह माना। कई लोगों के लिए महंगे प्रोटीन पाउडर और विशेष खाद्य उत्पादों को रोजाना खरीदना संभव नहीं होता। ऐसे में यह धारणा भी बन सकती है कि पर्याप्त प्रोटीन लेने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना जरूरी है। जबकि सामान्य भारतीय रसोई में मौजूद दाल, चना, राजमा, सोयाबीन और दूध जैसे खाद्य पदार्थ भी प्रोटीन के उपयोगी स्रोत हैं। जरूरत इस बात की है कि लोगों को इन विकल्पों के सही इस्तेमाल और संतुलित भोजन के बारे में जानकारी दी जाए। इससे सीमित बजट में भी रोजाना के भोजन को अधिक पौष्टिक बनाया जा सकता है।
रोज की थाली में शामिल करें प्रोटीन से भरपूर चीजें
प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए रोज के भोजन में बहुत बड़े बदलाव करना जरूरी नहीं है। दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और मेवे जैसे खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। शाकाहारी भोजन करने वाले लोग दाल, चना, सोया और दूध से बने उत्पादों के जरिए प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, मांसाहारी भोजन करने वालों के लिए अंडे और मछली भी विकल्प हो सकते हैं। रोटी या चावल के साथ दाल, चना या किसी अन्य प्रोटीन स्रोत को शामिल करने से भोजन का पोषण संतुलन बेहतर हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति की प्रोटीन जरूरत उसकी उम्र, वजन, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित भोजन करना अधिक उपयोगी है। नियमित और संतुलित खानपान से शरीर को जरूरी पोषण देने में मदद मिल सकती है।
5 साल से कम उम्र के बच्चों के आंकड़े भी चिंताजनक
रिपोर्ट में छोटे बच्चों के पोषण से जुड़े आंकड़ों ने भी चिंता बढ़ाई है। इसके अनुसार, पांच साल से कम उम्र के करीब 35 फीसदी बच्चे बौनेपन और 32 फीसदी बच्चे कम वजन की समस्या से प्रभावित बताए गए हैं। रिपोर्ट में लगभग हर तीसरे बच्चे में पोषण की कमी से जुड़ी समस्या होने की बात कही गई है। बचपन में पर्याप्त पोषण मिलना शारीरिक विकास, मांसपेशियों के निर्माण और सीखने-समझने की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण होता है। लंबे समय तक पोषण की कमी रहने पर बच्चों की लंबाई और वजन का विकास प्रभावित हो सकता है। हालांकि, बौनापन और कम वजन केवल प्रोटीन की कमी से नहीं होते, बल्कि इनके पीछे समग्र कुपोषण, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं। बच्चों को उम्र के अनुसार संतुलित आहार देना और समय-समय पर उनके विकास की निगरानी करना जरूरी है। साथ ही, बच्चों के पोषण से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
मिलेट्स यानी श्रीअन्न भी हो सकते हैं डाइट का हिस्सा
रिपोर्ट में ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मिलेट्स यानी श्रीअन्न को भी रोजाना के भोजन में शामिल करने पर जोर दिया गया है। ये अनाज फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों के स्रोत हैं। हालांकि, इनका प्रोटीन स्तर अलग-अलग होता है और इन्हें अकेले प्रोटीन की पूरी जरूरत का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। मिलेट्स को दाल, दूध, दही, अंडे या अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ खाने से भोजन को अधिक संतुलित बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, बाजरे की रोटी के साथ दाल या रागी के साथ दूध को डाइट में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, ज्वार और बाजरे का इस्तेमाल पारंपरिक व्यंजनों के रूप में भी किया जा सकता है। इन अनाजों को रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने से डाइट में विविधता बढ़ सकती है। सही मात्रा में अनाज, दालें, सब्जियां और अन्य प्रोटीन स्रोतों का सेवन बेहतर पोषण की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।
प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए जागरूकता जरूरी
रिपोर्ट के आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि केवल नियमित भोजन करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी पोषण गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए महंगे सप्लीमेंट खरीदने के बजाय पहले सामान्य भोजन में उपलब्ध किफायती स्रोतों को शामिल किया जा सकता है। दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध और दही जैसे खाद्य पदार्थ इस दिशा में मददगार हो सकते हैं। बच्चों, किशोरों, बुजुर्गों और अधिक शारीरिक गतिविधि करने वाले लोगों की पोषण संबंधी जरूरतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही, प्रोटीन और फाइबर के बीच अंतर समझना भी जरूरी है, क्योंकि दोनों शरीर में अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं। संतुलित आहार, सही खानपान की आदतें और पोषण संबंधी जागरूकता से स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसलिए रोज की थाली में स्वाद के साथ-साथ पोषण का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।