चीन जैसी बंद संरचना वाले देश में शीर्ष सैन्य अधिकारियों की अचानक बर्खास्तगी विश्व राजनीति में हलचल पैदा करती है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के दो सबसे वरिष्ठ जनरल—झांग योउशिया और ल्यू झेनली—को बिना किसी पूर्व संकेत के हटा दिया। चीन के रक्षा मंत्रालय ने आरोप लगाया कि दोनों “गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघनों” में शामिल थे। यह अस्पष्ट लेकिन बेहद गंभीर शब्दावली चीन के राजनीतिक तंत्र में किसी बड़े संकट का संकेत देती है, जो सैन्य नेतृत्व की विश्वसनीयता और वैश्विक सुरक्षा ढांचे दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
कौन थे ये जनरल और क्यों माना जाता था इन्हें अपराजेय
झांग योउशिया न केवल PLA के सबसे वरिष्ठ जनरल थे, बल्कि शी जिनपिंग के अत्यंत करीबी भी माने जाते थे। वे सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के उपाध्यक्ष और पोलितब्यूरो के सदस्य—दोनों ही पद चीन की राजनीतिक व्यवस्था के शीर्ष पर स्थित हैं। झांग और शी के परिवारों के संबंध 1930 के दशक से जुड़े बताए जाते हैं।
ल्यू झेनली भी PLA की थल सेना के पूर्व कमांडर और जॉइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के प्रमुख रह चुके हैं। दोनों ही सैन्य ढांचे में व्यापक प्रभाव रखते थे और चीनी सैन्य रणनीति के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माने जाते थे। ऐसे दो जनरलों को बिना चेतावनी हटाया जाना दर्शाता है कि मामला अत्यंत गम्भीर है।
बर्खास्तगी के पीछे क्या-क्या हो सकते हैं कारण
विश्लेषकों ने इस कार्रवाई के पीछे दो प्रमुख संभावनाएँ बताई हैं। पहली—सैन्य नियुक्तियों, हथियार खरीद, आपूर्ति श्रृंखला और रसद तंत्र में भारी भ्रष्टाचार में सीधी संलिप्तता। दूसरी—पूर्व कार्यकाल के दौरान हुए अनियमितताओं की जिम्मेदारी।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट ने तो और भी चौंकाने वाला दावा किया है—झांग योउशिया पर चीन के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अमेरिका को देने के आरोप की जांच भी चल रही है। यदि यह आरोप सच साबित होते हैं, तो यह चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं होगा।
क्या शी जिनपिंग की सत्ता कमजोर हुई या और अधिक केंद्रीकृत?
शी जिनपिंग पहले ही भ्रष्टाचार को चीन का “मुख्य संघर्ष” घोषित कर चुके हैं। जनरलों की इस बर्खास्तगी को सत्ता बनाए रखने की कठोर नीति का ही हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार शी की व्यक्तिगत शक्ति न तो कमजोर हुई है और न ही बढ़ी—बल्कि यह फैसला दर्शाता है कि वे अब भी सैन्य ढांचे को पूर्णतः नियंत्रण में रखना चाहते हैं।
हालांकि, सेना में बार-बार हो रही कार्रवाई और शीर्ष कमांडरों की बर्खास्तगी यह भी संकेत देती है कि PLA की एक बड़ी परत शी जिनपिंग के विश्वास के दायरे से बाहर हो चुकी है। इससे सैन्य मनोबल पर प्रभाव पड़ सकता है और ताइवान से संबंधित आक्रामक कदम अस्थायी रूप से धीमे पड़ सकते हैं।
क्या चीन की सैन्य क्षमता पर पड़ सकता है असर?
कई सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सैन्य क्षमता पर इसका तत्काल प्रभाव नहीं दिखेगा, क्योंकि PLA की संरचना अत्यंत विशाल है। लेकिन नेतृत्व स्तर पर ऐसी अस्थिरता रणनीतिक फैसलों की गति को धीमा कर सकती है।
साथ ही यह घटना वैश्विक समुदाय के लिए एक संकेत है कि चीन की शक्ति संरचना बाहरी तौर पर भले ही एकजुट दिखाई दे, लेकिन भीतर बड़े विरोधाभास और संघर्ष मौजूद हैं।
भविष्य के संकेत: क्या PLA में शुरू हो चुका है ‘संस्कृति परिवर्तन’?
कई जानकारों के अनुसार यह कदम PLA में व्यापक “संस्कृति परिवर्तन” का प्रतीक है—जहां भ्रष्टाचार, गुटबाजी और सूचना-लीकेज पर जीरो टॉलरेंस लागू किया जा रहा है। शी जिनपिंग ने अब तक कई उच्च-स्तरीय अधिकारियों को हटाया है, लेकिन यह पहली बार है जब सबसे शक्तिशाली जनरलों पर गाज गिरी है।
यह कदम चीन की आंतरिक राजनीति, सुरक्षा रणनीति और विदेश नीति—तीनों पर दूरगामी असर छोड़ सकता है, जिसकी गूंज आने वाले महीनों तक अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुनाई देगी।
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