साल 2021 में भारत में iPhone का उत्पादन शुरू करने के बाद 2025 ऐपल के लिए अब तक का सबसे सफल वर्ष साबित हुआ है। केंद्र और राज्य सरकारों को दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भारत से iPhone का निर्यात 23 अरब डॉलर यानी लगभग ₹2.03 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह आंकड़ा वर्ष 2024 की तुलना में करीब 85 प्रतिशत अधिक है, जो भारत की तेजी से बढ़ती विनिर्माण क्षमता को दर्शाता है।
PLI योजना ने बदली ऐपल की रणनीति
भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना ने ऐपल के लिए देश में उत्पादन और निर्यात की दिशा पूरी तरह बदल दी। इस योजना के लागू होने के बाद ऐपल का मुख्य फोकस निर्यात आधारित मैन्युफैक्चरिंग पर रहा। 2021 में जहां iPhone निर्यात महज ₹8,800 करोड़ था, वहीं 2022 में यह बढ़कर ₹36,234 करोड़ हो गया। 2023 में निर्यात ₹74,000 करोड़ तक पहुंचा और 2024 में यह आंकड़ा ₹1.1 लाख करोड़ को पार कर गया। 2025 में ₹2 लाख करोड़ का आंकड़ा पार करना इस निरंतर वृद्धि का स्वाभाविक परिणाम माना जा रहा है।
भारत में उत्पादन की शुरुआत और शुरुआती चुनौतिया
PLI योजना लागू होने के बाद 2020 में ऐपल ने अपने दो प्रमुख कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स विस्ट्रॉन और फॉक्सकॉन के साथ भारत में प्रवेश किया। हालांकि, कोरोना महामारी और चीन के साथ सीमा पर बढ़े तनाव के कारण उत्पादन की शुरुआत में देरी हुई। अंततः 2021 में भारत में iPhone निर्माण शुरू हो सका, जिसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक बाजारों के लिए निर्यात को बढ़ावा देना था।
चीन से भारत की ओर शिफ्ट होती सप्लाई चेन
इस अवधि में ऐपल की वैश्विक सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव देखने को मिला। कंपनी ने धीरे-धीरे चीन पर निर्भरता कम करते हुए भारत को वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करना शुरू किया। सरकार ने प्रेस नोट-3 के तहत मौजूद पाबंदियों के बावजूद चीन की 14 कंपनियों को भारत में निवेश की अनुमति दी, ताकि सप्लाई चेन बाधित न हो। 2023 से ऐपल ने भारतीय कंपनियों को भी अपनी आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करना शुरू किया, जिससे घरेलू उद्योग को मजबूती मिली।
MSME सेक्टर को मिला तकनीकी लाभ
ऐपल की सप्लाई चेन में भारतीय कंपनियों के प्रवेश से देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों को बड़ा फायदा हुआ है। तकनीकी हस्तांतरण, गुणवत्ता मानकों में सुधार और कौशल विकास के रूप में MSME सेक्टर को नई दिशा मिली। सरकार के लिए यह फैसला चुनौतीपूर्ण था, लेकिन इसके दीर्घकालिक लाभ अब स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।
टाटा समूह की एंट्री से बढ़ी भारतीय भागीदारी
ऐपल के इकोसिस्टम में शामिल होने वाला पहला बड़ा भारतीय समूह टाटा ग्रुप बना। 2023 में टाटा समूह ने कर्नाटक स्थित विस्ट्रॉन की iPhone फैक्टरी का अधिग्रहण किया। इसके बाद तमिलनाडु में पेगाट्रॉन की iPhone यूनिट में भी बहुलांश हिस्सेदारी खरीदी गई। इस कदम ने भारत में ऐपल मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूत आधार प्रदान किया।
आठ राज्यों में फैला ऐपल का आपूर्ति नेटवर्क
वर्ष 2024 के बाद कई भारतीय कंपनियां कलपुर्जा और सब-असेंबली सप्लायर के रूप में ऐपल की सप्लाई चेन का हिस्सा बनीं। इनमें मदरसन, हिंडाल्को, विप्रो पारी, जैबिल, एक्वस, एसएफओ टेक्नोलॉजीज और भारत फोर्ज जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। वर्तमान में ऐपल के आपूर्तिकर्ता भारत के आठ राज्यों में फैले हुए हैं, जिससे देशभर में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को बल मिला है।
मेक इन इंडिया को वैश्विक पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि iPhone निर्यात में यह ऐतिहासिक वृद्धि भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करती है। ‘मेक इन इंडिया’ पहल अब केवल घरेलू उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि भारत को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में उभार रही है।
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