सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक के तहत भीषण हवाई हमले किए हैं। ये हमले 13 दिसंबर को अमेरिकी सैनिकों पर हुए घातक हमले के जवाब में किए गए, जिसमें तीन अमेरिकियों की मौत हुई थी। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ उसकी “जीरो टॉलरेंस नीति” का स्पष्ट संदेश है।
ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक की पृष्ठभूमि
13 दिसंबर 2025 को सीरिया के पल्मायरा इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला हुआ था। इस हमले के बाद अमेरिका ने तत्काल जवाब देने का फैसला किया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर 19 दिसंबर 2025 को ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक की औपचारिक शुरुआत की गई, जिसका उद्देश्य ISIS की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।
CENTCOM की भूमिका और हमलों का समय
इन हवाई हमलों का संचालन अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने किया, जो मध्य पूर्व क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों की निगरानी करती है। सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एयर स्ट्राइक का वीडियो साझा करते हुए बताया कि ये हमले अमेरिकी समयानुसार दोपहर करीब 12:30 बजे किए गए। इन अभियानों में अमेरिकी सेनाओं ने सहयोगी देशों की सेनाओं के साथ मिलकर कार्रवाई की।
पूरे सीरिया में ISIS के ठिकानों पर हमला
CENTCOM के अनुसार, ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक के तहत पूरे सीरिया में ISIS के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि सुरक्षा कारणों से सटीक लोकेशन का खुलासा नहीं किया गया, लेकिन यह स्पष्ट किया गया कि आतंकियों के बुनियादी ढांचे, हथियार भंडारण और कमांड सेंटर इस हमले का मुख्य लक्ष्य थे।
पहले भी 70 ठिकानों पर हो चुका है हमला
यह पहली बार नहीं है जब अमेरिका ने इतने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की हो। इससे पहले 19 दिसंबर को ही अमेरिका ने ISIS के 70 ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इसके बाद बीते सप्ताह ब्रिटेन और फ्रांस की सेनाओं ने भी सीरिया के होम्स प्रांत के ऐतिहासिक पल्मायरा क्षेत्र में ISIS के खिलाफ हवाई हमले किए, जिससे आतंकियों पर दबाव और बढ़ गया।
ISIS क्या है और क्यों है अमेरिका का निशाना
ISIS, जिसे इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया कहा जाता है, एक सुन्नी चरमपंथी आतंकी संगठन है। इसकी उत्पत्ति इराक में अल-कायदा से हुई थी और इसका प्रभाव उत्तरी इराक व सीरिया तक फैला रहा है। अमेरिका लंबे समय से इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानता रहा है और इसी कारण इसके खिलाफ लगातार सैन्य अभियान चलाता रहा है।
ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक का मुख्य उद्देश्य
इस ऑपरेशन का उद्देश्य केवल जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि ISIS की सैन्य रीढ़ तोड़ना है। इसमें आतंकी ठिकानों, हथियारों के गोदामों और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम को नष्ट किया जा रहा है, ताकि भविष्य में अमेरिकी और सहयोगी सेनाओं पर होने वाले हमलों को रोका जा सके।
वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश
ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक के जरिए अमेरिका ने यह साफ कर दिया है कि वह अपने सैनिकों और नागरिकों पर हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह कार्रवाई न सिर्फ ISIS के लिए चेतावनी है, बल्कि दुनिया भर के आतंकी संगठनों के लिए भी एक कड़ा संदेश मानी जा रही है।
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