क्या होगा यदि आप रोज़ाना भेजे जाने वाले एक छोटे से वॉइस नोट के ज़रिए यह पता लगाया जा सके कि आप अवसाद के शुरुआती चरण में हैं या नहीं? हालिया शोध यह संकेत दे रही है कि यह विचार अब विज्ञान-कथा नहीं बल्कि एक तेजी से उभरती वास्तविकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे बोलने का तरीका––स्वर, उतार-चढ़ाव, लय, ऊर्जा और प्रवाह––हमारी मानसिक स्थिति के बेहद सूक्ष्म संकेत अपने भीतर समेटे होते हैं।
अवसाद और पारंपरिक पहचान प्रक्रिया की सीमाएँ
अवसाद दुनिया भर में सबसे व्यापक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है, और इसकी पहचान अक्सर प्रश्नावली तथा क्लिनिकल इंटरव्यू जैसी प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है। ये तरीके कभी-कभी व्यक्तिपरक हो सकते हैं और कई बार मरीज को समय रहते मदद नहीं मिल पाती। ऐसे में आवाज़ आधारित विश्लेषण एक नई दिशा प्रदान करता है, क्योंकि अवसाद के दौरान व्यक्ति की बोलने की शैली में बहुत हल्के लेकिन महत्त्वपूर्ण बदलाव आते हैं जिन पर मानव ध्यान नहीं दे पाता, पर मशीनें पकड़ लेती हैं।
एम्स की शोध: आवाज़ में छिपे वैज्ञानिक संकेत
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली द्वारा की जा रही शोध ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। इस अध्ययन में 423 युवा प्रतिभागियों की आवाज़ के नमूनों का विश्लेषण किया गया। इन्हें मानसिक स्वास्थ्य की पारंपरिक जांच प्रक्रिया से भी गुजारा गया, ताकि उनकी वास्तविक मनोवैज्ञानिक स्थिति का आकलन हो सके। शोधकर्ताओं ने आवाज़ के प्रवाह, उच्चारण, स्वर, पिच और ऊर्जा जैसे कारकों पर विशेष ध्यान दिया।
अवसाद से जुड़े आवाज़ के बदलते पैटर्न
शोध बताती है कि अवसादग्रस्त लोगों में आवाज़ के कई विशेष पैटर्न दिखाई देते हैं। इनमें भावनात्मक ऊष्मा में कमी, स्वर का सपाट हो जाना, बोलने की प्रवाहशीलता में गिरावट और ऊर्जा का घट जाना शामिल है। ये सूक्ष्म बदलाव मशीन लर्निंग मॉडल के लिए महत्त्वपूर्ण संकेत बन गए। जब इन आवाज़ी आंकड़ों को क्लिनिकल डेटा के साथ मिलाया गया, तो एआई मॉडल ने लगभग 60 से 78 प्रतिशत सटीकता के साथ अवसाद की भविष्यवाणी की।
प्रारंभिक जांच का एक नया युग
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक चिकित्सकीय निदान का विकल्प नहीं है, बल्कि एक शुरुआती स्क्रीनिंग टूल के रूप में काम आ सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। यदि ऐसा सिस्टम व्यापक स्तर पर विकसित होता है, तो यह मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के बोझ को कम कर सकता है और लोगों को स्वयं के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एक सरल, सुगम और निजी साधन प्रदान कर सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में तकनीक की बढ़ती भूमिका
जैसे-जैसे एआई और वॉइस विश्लेषण तकनीक आगे बढ़ रही है, यह संभव है कि भविष्य में हमारी रोज़मर्रा की बातचीत ही हमारी मानसिक सेहत के बदलावों का संकेत देने लगेगी। यह शोध मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो तकनीक और चिकित्सा के सहयोग से एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।
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