सावन का महिना शुरु हो चुका है ऐसे में शिव के अनोखे-अनोखे भक्त देखने को मिलते है।इसी बीच शिव भक्त दूर-दूर से कांवडिए जल लेकर भगवान भोले के पास पहुंच कर उनको जल चड़ाते है। हर साल कांवड़ यात्रा में कुछ ना कुछ अनोखा देखने को मिलता है। कंधे पर कांवड़ लिए जल चढ़ाने तो हजारों लोग जाते हैं लेकिन इस बार कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला है।
शिव जी के साथ पीएम मोदी की मूर्ति
दरअसल इस बार कांवड़ यात्रा में एक श्रद्धालु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मूर्ति को कंधे पर बिठा कर जल चढ़ाने जाता दिखा। वहीं, दूसरे कांवड़िए ने कांधे पर भगवान शिव की मूर्ति को बिठा रखा थाहालांकि, भोले बाबा की मूर्ति को कंधे पर बिठाए हर साल कुछ कांवड़िए दिख जाते हैं लेकिन इस बार का नजारा लगा है। शायद ये पहली बार है जब कोई कांवड़िया कांधे पर पीएम मोदी की मूर्ति बिठाए दिखाई दिया है।ये नजारा देखने को मिला हरिद्वार में जहां बागपत के रूपेंद्र तोमर और सोनू त्यागी प्रधान मंत्री मोदी और भगवान शिव की मूर्तियों को अनुष्ठान स्नान के लिए हर की पौड़ी ले गए हैं।
क्या होती है कांवड़ यात्रा?
कांवड़ यात्रा एक महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थयात्रा है, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाई जाती है। भगवान शिव के भक्त, जिन्हें "कांवड़िए" के नाम से जाना जाता है, गंगा, यमुना और सरस्वती जैसी पवित्र नदियों से जल इकट्ठा करने के लिए पैदल चलते हैं। यह जल फिर शिव मंदिरों में चढ़ाया जाता है। सावन (जुलाई-अगस्त) के महीने में होने वाली इस यात्रा के दौरान भक्त नारंगी रंग के कपड़े पहनते हैं और अपने कंधों पर कांवड़ नामक बांस की छड़ी रखते हैं। इस छड़ी के दोनों सिरों से पवित्र जल से भरे बर्तन लटकते हैं। यह यात्रा कई दिनों तक चलती है और लंबी दूरी तय करती है, जो भक्ति और धीरज का प्रतीक है। सावन के दौरान शिव भक्त बड़ी संख्या में इस तीर्थयात्रा पर आते हैं। वे हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, सुल्तानगंज और वाराणसी जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों से जल इकट्ठा करते हैं। वापस लौटने पर इस एकत्र किए गए जल को स्थानीय शिव मंदिरों में चढ़ाया जाता है।
WRITTEN BY- DEEPIKA PANDEY
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