नई दिल्ली | देश के तीन राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की छह विधानसभा और लोकसभा सीटों पर आज उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। सुबह से ही मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंचकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनावी मैदान में बीजेपी, कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, टीवीके, सीपीआई समेत कई प्रमुख दल आमने-सामने हैं। इन उपचुनावों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर पर महासंग्राम
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इन चुनावों को राज्य में मई में सत्ता संभालने के बाद बीजेपी सरकार के लिए शुरुआती राजनीतिक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। इन सीटों के नतीजों से यह भी संकेत मिलने की उम्मीद है कि बिखरे विपक्ष में कौन-सी पार्टी बीजेपी के सामने प्रमुख चुनौती बनकर उभरती है। सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों की नजर अल्पसंख्यक मतदाताओं के मतदान रुझान पर भी है।
नंदीग्राम में भावनात्मक और राजनीतिक मुकाबला
नंदीग्राम का चुनाव राजनीतिक के साथ-साथ भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी ने यहां हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। वह चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे और विधानसभा चुनाव में जीत के कुछ समय बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। विपक्षी खेमे ने भी मुकाबले को रोचक बना दिया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने अपने उम्मीदवार का नाम वापस लेकर कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया है। वहीं, रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी तृणमूल गुट ने मोहम्मद एतेशमुल हक को मैदान में उतारा है। CPI भी चुनावी मुकाबले में शामिल है।
रेजीनगर में कई दल आमने-सामने
रेजीनगर सीट पर बीजेपी, कांग्रेस, CPI-M, टीएमसी के दो गुट और आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के बीच मुकाबला है। AJUP ने पूर्व विधायक हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है। हुमायूं कबीर ने नौदा सीट अपने पास रखने के बाद रेजीनगर विधानसभा सीट से इस्तीफा दिया था, जिसके कारण यहां उपचुनाव हो रहा है।
असम की नगांव लोकसभा सीट पर बीजेपी-कांग्रेस में मुकाबला
असम की मुस्लिम बहुल नगांव लोकसभा सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प है। बीजेपी इस सीट पर जीत दर्ज कर अपना राजनीतिक दायरा बढ़ाना चाहती है, जबकि कांग्रेस अपने गढ़ को बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। AIUDF भी अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश में है। इस उपचुनाव में कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें नौ निर्दलीय हैं। प्रमुख उम्मीदवारों में कांग्रेस के पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा, बीजेपी के पूर्व IAS अधिकारी देवाशीष शर्मा और AIUDF के मौजूदा विधायक बदरुद्दीन अजमल शामिल हैं। यह उपचुनाव प्रद्युत बोरदोलोई के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद हो रहा है। वह अब बीजेपी के विधायक हैं।
तमिलनाडु में मदुरांतकम और धारापुरम पर नजर
तमिलनाडु की मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर भी आज मतदान हो रहा है। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन, विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन और अन्नाद्रमुक प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने जमकर प्रचार किया। उपचुनावों में आमतौर पर इतनी आक्रामक राजनीतिक सक्रियता देखने को नहीं मिलती, लेकिन इस बार प्रमुख नेताओं के प्रचार ने इन दोनों सीटों के महत्व को बढ़ा दिया है।
टीवीके, डीएमके और AIADMK की प्रतिष्ठा दांव पर
इन उपचुनावों के नतीजे तमिलनाडु की सियासत में सत्तारूढ़ टीवीके और विपक्षी दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। टीवीके की कोशिश विधानसभा में अपनी ताकत बढ़ाने की है, जबकि डीएमके के लिए यह राजनीतिक वापसी का मौका है। अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद डीएमके के लिए इन सीटों पर जीत काफी अहम होगी। वहीं, तीसरे स्थान पर खिसकी AIADMK भी अपना खोया राजनीतिक आधार वापस हासिल करने की कोशिश में जुटी है।
पांच दलों के बीच कड़ा मुकाबला
मदुरांतकम सीट पर 27 उम्मीदवार, जबकि धारापुरम सीट पर 22 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन चुनावों में टीवीके, डीएमके, AIADMK, वाम दलों और तमिल राष्ट्रवादी टीवीके के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। तमिलनाडु विधानसभा में फिलहाल टीवीके के 107 विधायक हैं। डीएमके के 59, AIADMK के 41, कांग्रेस के पांच और अन्य सहयोगी एवं वाम दलों के विधायक भी सदन में मौजूद हैं। सदन में प्रभावी रूप से 227 सदस्य हैं।
पुडुचेरी की थट्टनचावडी सीट पर भी मतदान
पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट पर भी आज वोट डाले जा रहे हैं। इस सीट सहित सभी छह उपचुनावों में सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान होगा।
9 अक्टूबर को आएगा फैसला
इन सभी उपचुनावों के नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। छह सीटों के परिणाम न केवल संबंधित दलों की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करेंगे, बल्कि हालिया विधानसभा चुनावों के बाद जनता के शुरुआती मूड का भी संकेत दे सकते हैं।