देश में चुनाव समाप्त होते ही कांग्रेस की तरफ से किए गए लोक-लुभावने वादे अब तक धरातल पर उतरते नहीं दिख रहे हैं. जिन राज्यों में सरकार बन गई, वहां के लोग अब वादे पूरे होने की आस लगाए बैठे हैं. सवाल ये है कि आखिर पार्टी उनसे किया वादा कब निभाएगी.
चुनाव खत्म, चर्चा शुरू
4 जून को लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद कुछ तस्वीरें जितनी तेजी से सामने आईं, उतनी ही तेजी से गायब भी हो गईं. कई राज्यों में कांग्रेस कार्यालयों में महिलाओं की भीड़ वाली तस्वीरें भी सामने आई थीं. वे महिलाएं, जो इस उम्मीद में वहां पहुंची थीं कि कांग्रेस के घोषणापत्र में किए वादे और गारंटी कार्ड के मुताबिक उन्हें साल के एक लाख रुपए की पहली किश्त दी जाएगी. जाहिर है वे खाली हाथ घर लौट आईं. इसका कारण भी साफ था कि चाहे इंडिया गठबंधन ने चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया हो, लेकिन सरकार में नहीं आ सका. लिहाजा इस वादे को पूरा करने का कोई तरीका उनके पास नहीं था. लेकिन उन वादों का क्या जो कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में किए, मगर सत्ता में आने के बाद उस पर उन्हें पूरा न करने का आरोप लगा.
सरकार बनने के बाद भूले वादे
कांग्रेस की अभी तीन राज्यों में अपने बूते सरकार है- कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना. साथ ही, पार्टी झारखंड में जेएमएम के साथ गठबंधन सरकार में शामिल है. वैसे तो इन सभी राज्यों में कांग्रेस के चुनावी वादों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन सबसे तीखे सवाल कर्नाटक को लेकर पूछे जा रहे हैं. एक नजर डालते हैं कि कर्नाटक में कांग्रेस ने क्या वादे किए थे और उन्हें पूरा करने की कवायद कहां तक पूरी हुई।
लोक-लुभावन वादे हुए लुप्त
कर्नाटक में कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले कई लोक-लुभावन वादे किए थे. पार्टी की बड़ी जीत के पीछे इन वादों की बड़ी भूमिका रही. कुछ बड़े वादे जैसे हर परिवार को गृह ज्योति के तहत हर महीने 200 यूनिट मुफ्त बिजली, हर परिवार की महिला मुखिया को गृह लक्ष्मी के तहत दो हजार रुपए प्रति महीने, बीपीएल परिवारों को अन्न भाग्य के तहत 10 किलो खाद्यान्न, बेरोजगार स्नातकों को दो साल के लिए हर महीने तीन हजार रुपए और बेरोजगार डिप्लोमा धारकों को दो साल के लिए डेढ़ हजार रुपए प्रति महीने की युवनिधि. इसके अलावा महिलाओं को बसों में मुफ्त यात्रा के लिए शक्ति योजना.
इन सभी वादों को पूरा करने के लिए राज्य के खजाने पर बोझ बढ़ा और उस बोझ को कम करने के लिए अब राज्य सरकार दूसरे तरीकों से पैसा लाने की तैयारी कर रही है. उसका बोझ आखिरकार जनता पर ही पड़ रहा है।
नौकरी का सपना कितना साकार ?
हिमाचल प्रदेश की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. वहां कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के अपने घोषणा पत्र में पांच लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन इस मोर्चे पर अभी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. कर्नाटक ही तरह हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस ने मुफ्त बिजली का वादा किया था. इसके तहत 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त करने की बात कही थी, लेकिन अब हर यूनिट बिजली के दाम में 22 पैसे की बढोत्तरी कर दी गई. हिमाचल प्रदेश में भी महिलाओं को 1500 रुपए प्रति महीने देने का वादा था जो अब भी पूरा होना का इंतजार है।
तेलंगाना में महिलाओं को वादा पूरा होने की आस
तेलंगाना की बात करें तो वहां भी हालात कुछ ऐसे ही हैं. तेलंगाना मे कांग्रेस ने महिलाओं को हर महीने 2,000 रुपये, 500 रुपये में एलपीजी सिलेंडर, 18 साल की उम्र पूरी करने वाली लड़कियों को मुफ्त स्कूटी और अन्य वादे किए थे. लेकिन ये वादे पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं. महिलाओं से किए गए वादे, किसानों, किरायेदार किसानों और अन्य लोगों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ इनपुट सहायता पूरी नहीं हुई. तेलंगाना राज्य में आधे से ज़्यादा नियमित बसें नाममात्र के लिए महिलाओं के लिए मुफ़्त बस यात्रा लागू करती हैं.
Written By-Raaj Sharma
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