नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने कहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी समय के साथ ‘‘काफी परिपक्व हो गए'' हैं लेकिन उनकी असल परीक्षा यह होगी कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की मौजूदा सरकार में संसद में विपक्ष का नेतृत्व कैसे करते हैं। सेन ने कहा कि राहुल की ‘भारत जोड़ो यात्रा' ने न केवल उन्हें एक राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित किया, बल्कि देश के राजनीतिक परिदृश्य को भी समृद्ध किया है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में बीरभूम जिले के बोलपुर स्थित अपने पैतृक आवास पर ‘पीटीआई-भाषा' से विशेष साक्षात्कार में इस बात का जिक्र किया कि कैसे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के ट्रिनिटी कॉलेज में छात्र के रूप में राहुल इस बात को लेकर अनिश्चित थे कि जीवन में ‘‘वह क्या करना चाहते हैं'' क्योंकि ‘‘उस समय राजनीति उन्हें आकर्षित नहीं करती थी।'' उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वह (राहुल) अब काफी परिपक्व व्यक्ति हैं।
मैं उन्हें तब से जानता हूं जब वह ‘ट्रिनिटी कॉलेज' के छात्र थे...वह कॉलेज जहां मैंने पढ़ाई की और बाद में उसमें ‘मास्टर' बन गया। वह उस समय मुझसे मिलने आए थे और वह उस समय ऐसे व्यक्ति थे जो इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं थे कि वह क्या करना चाहते हैं। ऐसा लगता था कि उस समय उन्हें राजनीति पसंद नहीं थी।'' ‘भारत रत्न' से सम्मानित सिंह ने कहा कि कांग्रेस नेता को राजनीति में अपने शुरुआती दिनों में भले ही कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उनमें काफी बदलाव आया है और उनका हालिया प्रदर्शन ‘‘असाधारण रूप से अच्छा'' रहा है।
नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने कहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी समय के साथ ‘‘काफी परिपक्व हो गए'' हैं
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