मुंबई. आठवें वेतन आयोग की एक और बैठक पूरी हो गई है। बीते 22 और 23 अक्टूबर को मुंबई में कर्मचारी संगठनों के साथ वेतन आयोग की बैठक हुई। इससे पहले जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले वेतन आयोग ने दिल्ली लद्दाख कोलकाता और बेंगलुरु सहित कई प्रमुख राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में बैठकें की हैं। अब तक की ज्यादातर बैठकों में फिटमेंट फैक्टर महंगाई भत्ता यानी DA महंगाई राहत यानी DR और बेसिक सैलरी के मामले में सार्थक सुधार की मांग की गई है। मुंबई बैठक भी इन्हीं मुद्दों पर केंद्रित रही। आयोग अब इन सुझावों पर विचार करेगा।
यूनियनों की प्रमुख मांगें
कुछ कर्मचारी यूनियन मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग कर रहे हैं। इन बदलावों में एक निश्चित महंगाई स्तर पर DA को बेसिक सैलरी में मर्जर और भत्ते की गणना के फॉर्मूले में संशोधन करना शामिल है। फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स यानी FNPO ने मांग की है कि जब DA 25 प्रतिशत से अधिक हो जाए तो इसे बेसिक सैलरी में मिला दिया जाना चाहिए। भारत पेंशनर्स समाज ने DA और DR की समीक्षा साल में दो बार के बजाय हर तीन महीने में करने की मांग की है। एक निश्चित सीमा पार करने के बाद DR को बेसिक पेंशन में मिलाने का सुझाव भी दिया गया है।
5वें वेतन आयोग का पैटर्न
5वें वेतन आयोग ने सिफारिश की थी कि जब भी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI बेस इंडेक्स से 50 प्रतिशत बढ़ जाए तो DA को डियरनेस पे में बदल दिया जाए। इस डियरनेस पे को रिटायरमेंट बेनिफिट्स सहित सभी उद्देश्यों के लिए गिना जाना था। आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि सभी वेतन स्तरों के कर्मचारियों के लिए DA के माध्यम से महंगाई की 100 प्रतिशत भरपाई की जानी चाहिए। उस समय की सिफारिशें कर्मचारियों के हित में मानी गईं। मौजूदा मांगों में भी इसी तरह के प्रावधानों का जिक्र हो रहा है।
6वें वेतन आयोग का रुख
6वें वेतन आयोग ने किसी भी स्तर पर DA को बेसिक सैलरी में मिलाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। आयोग ने तर्क दिया कि संशोधित वेतन ढांचे में पहले से ही कीमतों में बदलाव के आधार पर भत्तों और लाभों में समय-समय पर बदलाव करने की व्यवस्था मौजूद है। इसके साथ ही वेतन आयोग ने DA की समीक्षा को हर तीन महीने के बजाय साल में दो बार करने की मौजूदा व्यवस्था को ही बनाए रखा। 6वें आयोग का रुख मौजूदा मांगों से अलग था। अब 8वें आयोग को इस पर नया फैसला लेना है।
7वें वेतन आयोग की सिफारिशें
7वें वेतन आयोग ने DA की गणना करने के मौजूदा तरीके को ही जारी रखा। आयोग का मानना था कि यह फॉर्मूला पिछले कई वर्षों से काफी प्रभावी रहा है। इसलिए इसने पूरी कार्यप्रणाली और गणना के तरीके में कोई बड़ा या बुनियादी बदलाव करने की सिफारिश नहीं की। 7वें आयोग की व्यवस्था अभी भी लागू है। कर्मचारी संगठन अब इसमें बदलाव चाहते हैं। 8वें आयोग के सामने पिछली सिफारिशों और वर्तमान मांगों का संतुलन बनाना चुनौती है।
8वें आयोग से उम्मीदें और आगे की राह
अब वेतन आयोग को इन मांगों पर फैसला लेना है। AICPI-IW की गणना के तरीके का बारीकी से विश्लेषण और समीक्षा करने का सुझाव भी दिया गया है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि नई सिफारिशों में उनके हितों का ध्यान रखा जाएगा। बेसिक सैलरी में DA मर्जर से वेतन और पेंशन दोनों प्रभावित होंगे। आयोग विभिन्न बैठकों में मिले सुझावों का अध्ययन कर रहा है। अंतिम रिपोर्ट आने में अभी समय लगेगा। कर्मचारी संगठन अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।