भोपाल डेस्क। देश में सर्दियों की शुरुआत से पहले ही वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। उत्तरप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और ओडिशा के 13 शहरों में हवा की गुणवत्ता दिल्ली से भी खराब दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 223 रहा, जबकि हरियाणा के पंचगांव में यह बढ़कर 378 तक पहुंच गया। उत्तर प्रदेश का हापुड़ 328 AQI के साथ देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल रहा। प्रदूषण बढ़ने के बीच वाहनों से निकलने वाले धुएं और पराली जलाने की घटनाओं को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
पंचगांव की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित, AQI 378
देश के प्रदूषित शहरों में हरियाणा के पंचगांव की स्थिति सबसे खराब रही। यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 378 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है।उत्तर प्रदेश के हापुड़ और बड़ौत में AQI 328-328 रहा। वहीं, बागपत में 282, मेरठ में 281 और खोड़ा में 256 दर्ज किया गया। इन शहरों में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को सांस संबंधी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है।
दिल्ली से ज्यादा प्रदूषित रहे इन शहरों के आंकड़े
गुरुवार को दर्ज AQI के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
शहर
AQI
पंचगांव, हरियाणा
378
हापुड़, उत्तर प्रदेश
328
बड़ौत, उत्तर प्रदेश
328
बागपत, उत्तर प्रदेश
282
मेरठ, उत्तर प्रदेश
281
खोड़ा, उत्तर प्रदेश
256
अंगुल, ओडिशा
244
करनाल, हरियाणा
242
नोएडा, उत्तर प्रदेश
242
खैरथल, राजस्थान
232
दिल्ली
223
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर दिल्ली से अधिक दर्ज किया गया। हालांकि, AQI में उतार-चढ़ाव मौसम, हवा की गति और स्थानीय उत्सर्जन जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
254 शहरों में सिर्फ 123 की हवा अच्छी या संतोषजनक
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, देशभर में निगरानी वाले 254 शहरों में से केवल 123 शहरों में हवा की गुणवत्ता अच्छी या संतोषजनक श्रेणी में थी।
आंकड़ों के अनुसार:
123 शहरों में हवा अच्छी या संतोषजनक रही।
111 शहरों में वायु गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में दर्ज की गई।
17 शहरों में हवा खराब रही।
3 शहरों में वायु गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पाई गई।
वहीं, मिजोरम की राजधानी आइजोल में AQI 20 दर्ज किया गया, जो अच्छी वायु गुणवत्ता को दर्शाता है।
PM2.5 और PM10 से बढ़ रहा स्वास्थ्य जोखिम
प्रदूषित शहरों की हवा में मुख्य रूप से PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण पाए गए। ये कण वाहनों के धुएं, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और अन्य स्रोतों से हवा में फैलते हैं।
PM2.5 के बेहद छोटे कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस लेने में परेशानी, खांसी और हृदय एवं फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, प्रदूषण बढ़ने पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
दिल्ली-NCR में वाहनों से 19% प्रदूषण
दिल्ली-NCR में वाहनों से निकलने वाला उत्सर्जन वायु प्रदूषण का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान के आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को दिल्ली में प्रदूषण में वाहनों की हिस्सेदारी 19% रही। इससे एक दिन पहले यह 21% दर्ज की गई थी।वहीं, पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 7% हो गई। जारी अनुमान के मुताबिक, शुक्रवार को पराली के धुएं की हिस्सेदारी 15% और शनिवार को 10% रह सकती थी।ये आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या के पीछे कई स्रोत जिम्मेदार हैं। वाहनों के उत्सर्जन के साथ पराली जलाने, धूल और मौसम की परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।
पराली जलाने पर 52 FIR, 21 लोग गिरफ्तार
हरियाणा और NCR में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई भी की जा रही है। चंडीगढ़ में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की समीक्षा बैठक के दौरान कृषि विभाग के निदेशक ने बताया कि पराली जलाने के मामलों में 52 FIR दर्ज की गईं और 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
मुंबई की हवा पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुंबई में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी चिंता जताई। अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को लागू करने में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए और कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।अदालत ने नगर निकायों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए त्योहारों के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण रोकने के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जरूरत बताई।
सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका
सर्दियों के दौरान हवा की गति कम होने और वातावरण में प्रदूषकों के जमा होने से कई शहरों में वायु गुणवत्ता और खराब हो सकती है। ऐसे में वाहनों से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण, निर्माण स्थलों की धूल कम करना और पराली जलाने की घटनाओं को रोकना महत्वपूर्ण होगा।प्रदूषण से निपटने के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।