भारतीय नौसेना के जाबांज अफसर उत्पल दत्ता ने कारगिल युद्ध में ना केवल एक अहम भूमिका निभाई थी, बल्कि ऑपरेशन तलवार के दौरान 26400 फीट ऊंचाई तक हेलीकॉप्टर उड़ाया... उनकी इस बहादुरी के लिए तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष जनरल वीपी मलिक ने उनके साहस की प्रशंसा करते हुए सम्मानित भी किया था। भारतीय नौसेना के हेलीकॉप्टर पायलट कैप्टन उत्पल दत्ता, फिलहाल गोवा स्थित नौसेना विमानन मुख्यालय में तैनात हैं।
भारत में सेना की थल, जल और वायु तीन शक्तियां हैं......और यह तीनों ही शक्तियां जब युद्ध में एक साथ काम करती हैं तो दुश्मन के छक्के छूट जाते हैं। कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी नौसेना भी एक्टिव हो गई थी और अरब सागर में उसकी गतिविधियां बढ़ रही थीं। जैसे-जैसे कारगिल में ऑपरेशन की गति बढ़ी, वैसे-वैसे समुद्र में नौसेना की गतिविधियां भी बढ़ीं। भारतीय नौसेना ने अरब सागर में आक्रामक गश्त की। एक समय पर 30 से ज्यादा भारतीय नौसेना के जहाज कराची बंदरगाह के बाहर सिर्फ 13 समुद्री मील (24 किलोमीटर) की दूरी पर मौजूद थे, यानी पाकिस्तान के जल क्षेत्र से मजह 2 किमी से भी कम दूरी पर भारतीय नौसेना मौजूद थी।
जाबांज अफसर ने उड़ाया था चेतक और चीता हेलिकॉप्टर -
4 जून से 22 जुलाई, 1999 के बीच ऑपरेशन विजय के अपने 77 घंटों के दौरान युद्ध में घायल हुए लोगों को घुमरी में बने एक अस्थाई अस्पताल तक पहुंचाने में मदद इस अफसर ने की थी और सैन्य सहायता जैसे रसद और गोला-बारूद सप्लाई करने में अहम भूमिका निभाई थी। यह कैप्टन दत्ता की पहली जंग थी। कैप्टन दत्ता ने उस दौरान चेतक और चीता हेलिकॉप्टर उड़ाया था। तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वेद प्रकाश मलिक के साथ भी उन्होंने द्रास क्षेत्र में एक टोही उड़ान भी भरी थी।
पहली बार इतनी ऊंचाई पर उड़ाया हेलिकॉप्टर -
नौसेना मेडल से सम्मानित कैप्टन उत्पल दत्ता ने बताया था कि कैसे उनके स्क्वाड्रन को गंभीर रूप से घायल लोगों को निकालने और सैनिकों को पानी, रसद और गोला-बारूद उपलब्ध कराने का काम सौंपा गया था। सेना की कमान के तहत, कैप्टन दत्ता ने चीता को सर्वाधिक ऊंचाई पर 26,400 फीट पर उड़ाया था और एक ऑब्जर्वेशन पोस्ट की अपनी ड्यूटी निभाई थी। जिसके बाद ही बोफोर्स तोपों को दुश्मन की चौकियों पर गोलाबारी करने में आसानी हुई थी। उन्होंने बताया था कि इससे पहले उस इलाके में कभी किसी ने इतनी ऊंचाई पर दुश्मन के इलाके में हेलीकॉप्टर उड़ाते नहीं देखा था।
नाकाबंदी कर की थी पाकिस्तान की घेराबंदी -
ऑपरेशन तलवार में पूरी तरह से हथियारों से लैस नेवी के जहाज, पनडुब्बी और विमान तैनात किए गए थे। इसके अलावा, नौसेना दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों की स्थिति का पता लगाने में भी जुटी हुई थी। समुद्री टोही (एमआर) विमानों ने इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई। उन्होंने दुश्मन की टोह लेने के अलावा अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा का काम संभाला। एक समय में जब भारतीय नौसेना एक नौसैनिक नाकाबंदी की तैयारी कर रही थी, तो इस बीच, पाकिस्तानी नौसेना ने भी भारतीय नौसैनिक बलों की जगहों और ताकत का पता लगाने के लिए एमआर सॉर्टी शुरू कर दी थी। जिसके बाद पाकिस्तानी नेवी को अहसास हुआ कि अगर उन्होंने कुछ एडवेंचर किया, तो यह उन पर कितना भारी पड़ सकता है।
WRITTEN BY- DILEEP PAL
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