इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में चर्चित भोजशाला विवाद की सुनवाई मंगलवार, 12 मई को पूरी हो गई। करीब दो घंटे चली सुनवाई में सभी पक्षों ने अपने तर्क न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने भी अपना पक्ष मजबूती से रखा। मामले में कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
विवाद का इतिहास
यह मामला 2022 में शुरू हुआ, जब रंजना अग्निहोत्री और उनके साथियों ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को इसका पूर्ण अधिकार देने की मांग की गई थी। साल 2024 में ASI ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने वसंत पंचमी पर दिनभर पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी। 6 अप्रैल 2026 से हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक चली।
याचिका की मुख्य मांगें
* हिंदू समाज को संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार।
* भोजशाला परिसर में मुस्लिम समाज की धार्मिक गतिविधियों पर रोक।
* केंद्र सरकार द्वारा ट्रस्ट का गठन और परिसर का प्रबंधन।
* मां सरस्वती की प्रतिमा की निरंतर पूजा-अर्चना सुनिश्चित।
* भोजशाला परिसर में नमाज पर रोक।
* ASI के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को निरस्त।
* ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाकर स्थापित करना।
हिंदू पक्ष ने मंदिर होने के तर्क दिए
हाईकोर्ट में 6 से 9 अप्रैल तक हिंदू पक्ष के वकील विष्णुशंकर जैन, विनय जोशी और मुख्य याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने भोजशाला को मंदिर बताते हुए तर्क रखे। इसके बाद मुस्लिम पक्ष और अन्य पक्षकारों ने इन दावों पर आपत्ति दर्ज कराई।
मुस्लिम पक्ष और सर्वे रिपोर्ट पर सवाल
सोमवार को हुई सुनवाई में मुस्लिम पक्ष के सीनियर एडवोकेट शोभा मेनन और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा। एडवोकेट तौसिफ वारसी कोर्ट में मौजूद रहे। सलमान खुर्शीद ने सर्वे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उपलब्ध तस्वीरें स्पष्ट नहीं थीं, रंगीन फोटो भी उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले के विपरीत, भोजशाला में कोई मूर्ति स्थापित नहीं है।
सर्वे प्रक्रिया पर आपत्तियां
एडवोकेट तौसिफ वारसी ने कहा कि सर्वे के दौरान पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर की मौजूदगी के लिए कोई न्यायालयीन आदेश नहीं था, फिर भी वे पूरे समय उपस्थित रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सर्वे आधुनिक तकनीक से होना था, लेकिन टीम ने पुरानी तकनीक “टोटल स्टेशन” का इस्तेमाल किया। सलमान खुर्शीद ने यह भी आरोप लगाया कि सर्वे की जानकारी मुस्लिम पक्ष को औपचारिक रूप से नहीं दी गई और गौतम बुद्ध की प्रतिमा के मिलने के बावजूद उसका उल्लेख रिपोर्ट में नहीं किया गया।