नई दिल्ली - कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक क्रूड ऑयल दबाव में नजर आया। बाजार में मिडिल ईस्ट से जुड़े जोखिम, OPEC+ की उत्पादन नीति और वैश्विक स्तर पर सप्लाई को लेकर चल रही गतिविधियों के बीच निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है।
MCX पर क्रूड ऑयल में बड़ी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोमवार को कच्चे तेल की कीमत में जोरदार कमजोरी आई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 19 अक्टूबर डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल 2.71 फीसदी फिसलकर 8,674 रुपये प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट से घरेलू कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल के कारोबार पर दबाव साफ दिखाई दिया। निवेशक अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की चाल और आने वाले दिनों में सप्लाई से जुड़े संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव
घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। कारोबार के दौरान WTI क्रूड करीब 90.11 डॉलर प्रति बैरल, जबकि Brent क्रूड लगभग 101.6 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों का असर भारत समेत दुनिया के कई देशों पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव होने पर आयात लागत, करेंसी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
मिडिल ईस्ट का जोखिम बना अहम फैक्टर
कच्चे तेल के बाजार में इस समय मिडिल ईस्ट की स्थिति एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम से तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है। यही वजह है कि बाजार में निवेशक घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहे हैं। हालांकि, जोखिम बढ़ने के बावजूद सोमवार को क्रूड की कीमतों में गिरावट दिखाई दी। इससे संकेत मिलता है कि फिलहाल बाजार में सप्लाई से जुड़े अन्य कारकों का भी कीमतों पर प्रभाव पड़ रहा है।
OPEC+ की नीति पर बाजार की नजर
कच्चे तेल के कारोबार में OPEC+ देशों की उत्पादन नीति भी अहम भूमिका निभाती है। उत्पादन बढ़ने या घटने की संभावनाओं का सीधा असर वैश्विक सप्लाई और कीमतों पर पड़ता है। इसके अलावा आने वाले समय में तेल की मांग, प्रमुख देशों की आर्थिक गतिविधियां और वैश्विक सप्लाई की स्थिति भी क्रूड की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगी।
आगे कैसी रह सकती है क्रूड की चाल?
फिलहाल कच्चे तेल का बाजार कई विरोधाभासी संकेतों के बीच कारोबार कर रहा है। एक ओर मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक जोखिम कीमतों को सहारा दे सकता है, तो दूसरी ओर उत्पादन और सप्लाई से जुड़े संकेत बाजार पर दबाव बना सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के लिए OPEC+ के फैसले, वैश्विक सप्लाई और मिडिल ईस्ट की स्थिति प्रमुख संकेतक बने रहेंगे।