देश में आम चुनावों के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। अब वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए पूर्ण केंद्रीय बजट का इंतजार है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 23 जुलाई को संसद में बजट पेश करेंगी। इस बार के केंद्रीय बजट में सरकार के पास वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए कराधान (टैक्सेशन) के प्रावधानों में सुधार करने का मौका है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने अंतरिम बजट भाषण के दौरान टैक्सेशन से जुड़ा कोई बड़ा बदलाव नहीं किया था। हालांकि उन्होंने करीब एक करोड़ लोगों को टैक्स से जुड़े लाभ होने की बात कही थी। दरअसल वित्त मंत्री ने पुराने टैक्सेशन से जुड़े पुराने विवादों के समाधान की दिशा में एक बड़ा एलान किया था।
करदाताओं को बजट से आस
अंतरिम बजट के दौरान वित्त मंत्री ने एलान किया था कि वर्ष 1962 से जितने पुराने करों से जुड़े विवादित मामले चले आ रहे हैं उनमें वर्ष 2009-10 तक लंबित रहे प्रत्यक्ष कर मांगों (डिमांड नोटिस) से जुड़े 25000 रुपये तक के विवादों को सरकार वापस ले लेगी। इसी तरह 2010-11 से 2014-15 के बीच लंबित रहे प्रत्यक्ष कर मांगों से जुड़े 10 हजार रुपये तक के मामलों को वापस लेने का फैसला किया गया था। वित्त मंत्री ने स्टार्टअप्स और पेंशन फंड्स में निवेश करने वालों को मिलने वाले कर लाभ की समयसीमा 31 मार्च 2024 से बढ़ाकर 31 मार्च 2025 करने का एलान किया था। ऐसे में स्टार्टअप्स में निवेश करने वालों को इस बजट से एक साल का अतिरिक्त कर लाभ मिलने की राह खुल गई थी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने अंतरिम बजट भाषण में बताया था कि पिछले 10 वर्षों में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में तीन गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। इस दौरान टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 2.4 गुना का इजाफा हुआ है। वित्त मंत्री ने यह भी बताया था कि आयकर रिटर्न दाखिल करने के बाद करदाताओं को टैक्स रिफंड मिलने में लगने वाले समय में कमी आई है। पहले इसमें औसतन 93 दिन का समय लगता था अब यह कम होकर 10 दिन रहा गया है।
कर व्यवस्था को विवेकपूर्ण बनाने का दावा
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में करदाताओं को आश्वस्त किया था कि उनके योगदान का देश के विकास और जनता के कल्याण के लिए विवेकपूर्ण उपयोग किया गया है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने कर दरों में कटौती की है और इन्हें विवेकपूर्ण बनाया है। नई कर योजना के तहत अब 7 लाख तक की आय वाले करदाताओं के लिए कोई कर देनदारी नहीं है। जबकि वित्तीय वर्ष 2013-14 में 2.2 लाख तक की आय वाले करदाताओं को ही कर देनदारी से छूट मिलती थी। टैक्सपेयर्स को मिलने वाली सुविधाओं कहा कि पिछले पांच वर्षों में करदाता सेवाओं में सुधार करने पर हमारा विशेष जोर रहा है।
आवास किराया (HRA) छूट गणना में बदलाव
वर्तमान में, केवल चेन्नई, मुंबई, दिल्ली और कोलकाता अधिनियम के तहत हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) गणना के लिए मेट्रो शहरों के रूप में अर्हता प्राप्त करते हैं और इस मद में वेतन के 50% की छूट के लिए पात्र हैं। गैर-मेट्रो शहर के वेतनभोगियों के लिए एचआरए छूट के अंतर्गत 40% की छूट का प्रावधान है। पिछले कुछ वर्षों में बेंगलुरु, हैदराबाद, गुड़गांव, पुणे जैसे शहरों में भी बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण विकास हुआ है और इन शहरों में भी किराया पारंपरिक मेट्रो शहरों के लगभग बराबर हैं। कहीं-कहीं तो यह मेट्रो शहरों से भी अधिक हैं। वेतनभोगियों की अपेक्षा है कि इस बार के पूर्ण बजट में नवविकसित शहरों को भी मेट्रो शहरों की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए और इन शहरों के लिए भी 50% भत्ता दिया जाना चाहिए।
Written By-Prishita Sharma
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