जम्मू कश्मीर में अचानक आतंकी हमले बढ़ने से देश देश स्तब्ध है। विपक्ष केंद्र सरकार पर लगातार हमले कर रहा है तो लोग पीएम मोदी की चुप्पी पर अचरज कर रहे हैं।लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि आतंकवादियों को उनको घर में घुसकर मारने की बात कहने वाले मोदी लगातार आतंकी हमलों और जवानों की शहादत पर मौन क्यों हैं।सवाल उठ रहा है कि कहीं तूफान के पहले की खामोशी तो नहीं है।मोदी सरकार एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी तो नहीं कर रही है।
32 महीने में 48 जवान शहीद
जम्मू कश्मीर राज्य में पिछले 78 दिनों में करीब 11 आतंकी हमले हुए हैं. केवल 30 दिनों के भीतर जम्मू में 7 आतंकी हमले हुए हैं. सोमवार रात डोडा इलाके में भारतीय सेना और आतंकवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में सेना के एक अधिकारी समेत 4 जवान शहीद हो गए. इसके साथ ही जम्मू क्षेत्र में पिछले 32 महीनों में शहीद हुए सेना के जवानों की संख्या 48 पहुंच गई है। आतंकी हमलों में 23 आम नागरिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है।
लगातार बढ़ रहे आतंकी हमलों और जवानों की शहादत से देशभर में लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है।लोग चाहते हैं कि पाकिस्तान के साथ चल रहा युद्धविराम खत्म होना चाहिए।लोग पीएम नरेंद्र मोदी के उस बयान की भी याद दिला रहे हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत अब घर में घुसकर मारता है. लोग कह रहे हैं कि सिर्फ आतंकी अड्डों, लॉन्चिंग पैड, प्रशिक्षण शिविरों आदि पर ही हवाई हमले करने से आतंकियों की घुसपैठ नहीं रुकेगी. पाकिस्तान की कमर ही तोड़नी होगी ताकि वह फिर सिर न उठा सके.लोगों का कहना है कि भारत को इजराइल से सबक लेना चाहिए जिसने अपने नागरिकों की हत्या के बाद हमास के गढ़ गाजा को नेस्तनाबूद कर दिया...
विपक्ष भी सरकार पर हमलावर
लगातार आतंकी हमलों और जवानों की मौत के बाद विपक्ष भी मोदी सरकार पर हमलावर है। नेता प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने जवानों की शहादत के लिए सीधे तौर पर मोदी सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार माना है।उन्होंने कहा है कि जवान आतंकी हमलों के शिकार हो रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार कुछ भी नहीं कर रही है. नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला,सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी सरकार के रवैये पर सवाल उठा चुके हैं.
चुनाव और AFSPA पर असंमजस
जम्मू कश्मीर में ये आंतकी हमले तब बढ़े हैं जब केंद्र सरकार सुरक्षाबलों की तैनाती कम करने पर विचार कर रही साथ ही सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (AFSPA) हटाने पर भी विचार किया जा रहा है।कानून व्यवस्था और आतंक के मोर्चे पर अब पुलिस को आगे रखने की योजना तैयार की जा रही है।सितंबर 2024 के अंत तक जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का गठन भी करना था।यह मोदी सरकार का वादा भी है और सुप्रीम कोर्ट का भी आदेश भी.,लेकिन ‘आतंक’ जिस तरह नए सिरे से सिर उठा रहा इसके बाद AFSPA के खात्मे और विधानसभा चुनाव दोनों पर असंमजस की स्थिति बन रही है।
क्या हैं रक्षा सचिव के बयान के मायने ?
आतंकी हमलों को लेकर सरकार कितनी गंभीर है ? इस पर पीएम मोदी का कोई ताजा बयान तो सामने नहीं आया है लेकिन रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने के बयान से जरूर एक चर्चा शुरू हो गई है कि कहीं भारत फिर तो पीओके में चल रहे आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में हमले की रणनीति तो नहीं बना रहा ? जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खात्मे के लिए अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन की रणनीति तो नहीं बन रही..रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने कहा है कि कठुआ हमले में पांच जवानों की मौत का बदला लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत इसके पीछे छिपी बुरी ताकतों को नेस्तनाबूद करके ही दम लेगा।
Written By-Kamlesh Chaubey
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