नई दिल्ली. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने नियमित प्रेस वार्ता में कहा कि एलएसी पर स्थिति तब बिगड़ती है जब चीनी सैनिक स्थापित गश्त पैटर्न से भटकते हैं। उन्होंने भारत के स्थायी रुख को दोहराया कि सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। यह बयान आईटीबीपी महानिदेशक के अरुणाचल में आमना-सामने के जिक्र के एक दिन बाद आया है। भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा मुद्दे पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के हित में है। मंत्रालय का रुख दृढ़ और संतुलित रहा।
अरुणाचल में आमना-सामना
आईटीबीपी महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने गुरुवार को राजस्थान के अलवर में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर आमना-सामना हुआ और यह स्थिति अभी भी जारी है। आईटीबीपी एलएसी के कुछ हिस्सों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार प्रमुख बल है। उन्होंने बताया कि चल रहे आमना-सामने के दौरान नई आईटीबीपी इकाई शौर्य कमांडो को भी तैनात किया गया। अरुणाचल में यह तनाव सीमा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला है। दोनों पक्षों के जवान आमने-सामने की स्थिति में हैं।
आईटीबीपी महानिदेशक का बयान
शत्रुजीत कपूर ने कहा कि आईटीबीपी ने सभी सीमा इकाइयों के लिए ड्रोन प्लाटून तैयार किए हैं और गलवान घाटी जैसी लड़ाइयों से निपटने के लिए नया स्ट्राइक कोर्स भी तैयार किया है। 2020 की गलवान घटना के बाद सुरक्षा बलों ने अपनी तैयारियों को और मजबूत किया है। महानिदेशक के बयान से साफ है कि सीमा पर सतर्कता बढ़ाई गई है। नई क्षमताओं के साथ आईटीबीपी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उनके शब्दों ने सीमा सुरक्षा की वर्तमान स्थिति को रेखांकित किया।
सैन्य वार्ता और सुलह के प्रयास
भारत और चीन ने अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सेक्टर में सैन्य कमांडरों के बीच 6 और 7 सितंबर को पहली वार्ता की थी। यह वार्ता चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत आने से कुछ दिन पहले हुई। शी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में स्थिर प्रगति का स्वागत किया। भारतीय पक्ष ने जोर दिया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता संबंधों के विकास का आधार है। चीन ने सीमा मुद्दे और द्विपक्षीय संबंधों के लिए दोहरी ट्रैक अपроच की बात कही।
द्विपक्षीय संबंधों में शांति की शर्त
भारत ने बार-बार कहा है कि सीमा पर शांति द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए आवश्यक आधार है। 2020 में लद्दाख में शुरू हुए सैन्य गतिरोध के बाद संबंध छह दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गए थे। अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों के बीच समझ बनने के बाद संबंधों को फिर से बनाने की कोशिश चल रही है। वर्तमान में नाजुक स्थिति में सीमा पर तनाव दोनों देशों के प्रयासों को प्रभावित कर सकता है। भारत शांति बनाए रखने पर बल दे रहा है।
गलवान के बाद की स्थिति और आगे की राह
गलवान घटना के बाद दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन को लेकर कई दौर की बातचीत की है। आईटीबीपी की नई तैयारियां और ड्रोन क्षमताएं सुरक्षा को मजबूत बनाने का संकेत हैं। विदेश मंत्रालय का बयान भारत की स्पष्ट नीति को दोहराता है। आगे भी सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत जारी रहेगी। सीमा पर स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के दीर्घकालिक हित में है। वर्तमान आमना-सामने की स्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर जोर दिया जा रहा है।