रायपुर/प्रयागराज। सनातन धर्म के सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को देशभर में विरोध-प्रदर्शन किया। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजीव गांधी चौक पर धरना-प्रदर्शन करते हुए उत्तरप्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कांग्रेस का यह विरोध प्रयागराज माघ मेला के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर है। पार्टी का आरोप है कि पवित्र स्नान के लिए पहुंचे शंकराचार्य, उनके शिष्यों और अन्य धर्माचार्यों को संगम स्नान से रोका गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जो सनातन परंपरा का खुला अपमान है।
प्रयागराज में क्या हुआ था?
माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ पवित्र स्नान के लिए संगम तट की ओर जा रहे थे। इसी दौरान मेला प्रशासन और पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रशासन का कहना है कि उस समय संगम क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ थी और सुरक्षा कारणों से किसी को भी बिना पूर्व अनुमति आगे जाने की इजाजत नहीं दी जा रही थी।
वहीं, शंकराचार्य और उनके समर्थकों का आरोप है कि यह केवल भीड़ नियंत्रण का मामला नहीं था, बल्कि जानबूझकर उन्हें रोका गया और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। इसके विरोध में शंकराचार्य ने माघ मेला परिसर में धरना भी दिया और प्रशासन से सार्वजनिक माफी की मांग की।
प्रशासन बनाम शंकराचार्य: विवाद ने पकड़ा कानूनी मोड़
मेला प्रशासन ने शंकराचार्य को एक नोटिस भी जारी किया, जिसमें उनसे ‘शंकराचार्य’ पद के उपयोग को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। प्रशासन का तर्क है कि इस पद से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। वहीं, शंकराचार्य पक्ष का कहना है कि अदालत का आदेश उनके धार्मिक अधिकारों और सम्मान पर रोक नहीं लगाता।
रायपुर में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन
इसी घटना के विरोध में रायपुर में शहर और ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। राजीव गांधी चौक पर धरना देते हुए कांग्रेसी हाथों में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तस्वीरें लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि उत्तरप्रदेश सरकार धार्मिक संतों के सम्मान की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक संत का अपमान नहीं, बल्कि सनातन धर्म और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
कांग्रेस की मांगें
उत्तरप्रदेश सरकार शंकराचार्य से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, धार्मिक संतों और परंपराओं के सम्मान की गारंटी दी जाए, कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करेगी।
राजनीतिक तकरार तेज
इस विवाद के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। जहां कांग्रेस इसे सनातन परंपरा का अपमान बता रही है, वहीं उत्तरप्रदेश सरकार और प्रशासन इसे सुरक्षा व कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला बता रहे हैं। फिलहाल शंकराचार्य के धरने और देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के चलते यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
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