लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस, दोनों पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के समर्थक असहमति जताने वालों को अलग-अलग नाम देकर निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि समस्या केवल किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि देश की पूरी राजनीतिक संस्कृति की है।
BJP और कांग्रेस दोनों पर साधा निशाना
गीतांजलि जे. आंग्मो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि देश की दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों के समर्थकों का रवैया काफी हद तक एक जैसा है। उन्होंने लिखा कि जब भी कोई स्वतंत्र या निष्पक्ष आवाज सामने आती है, तो उसे बिना तथ्यों के किसी राजनीतिक खेमे से जोड़ दिया जाता है। उनके मुताबिक, अलग-अलग झंडे होने के बावजूद दोनों पक्षों की कार्यशैली में समानता दिखाई देती है।
'पहले एंटी-नेशनल कहा, अब संघी बता रहे'
गीतांजलि ने अपने बयान में कहा कि जब सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था, तब BJP समर्थकों ने उन्हें 'देश-विरोधी', 'चीनी एजेंट' और 'विदेशी फंडिंग वाला' जैसे आरोपों से घेरा। वहीं, जब वांगचुक ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को केवल "दिखावा" बताया, तो कांग्रेस समर्थकों ने उन्हें 'संघी', 'RSS एजेंट' और 'BJP का समर्थक' कहना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की राजनीति लोकतांत्रिक संवाद को कमजोर करती है।
राजनीति की भाषा बदलने की जरूरत
गीतांजलि आंग्मो ने कहा कि भारत को केवल सरकार बदलने की नहीं, बल्कि राजनीति की कार्यशैली और भाषा बदलने की आवश्यकता है। उन्होंने ऐसी राजनीतिक संस्कृति की पैरवी की, जहां-
असहमति का जवाब संवाद से दिया जाए।
विरोध करने वालों का चरित्र हनन न किया जाए।
देशभक्ति को किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि ईमानदारी और सत्यनिष्ठा से आंका जाए।
अलग विचार रखने वालों का सम्मान किया जाए।
मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक को सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। स्वास्थ्य में सुधार के बाद वह अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने लद्दाख लौटने की अपनी योजना की जानकारी दी।
बोले- हमारा आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था
राजघाट पर मीडिया से बातचीत के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक था। उन्होंने दोहराया कि उनकी मांगें संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई थीं।
इस बयान की क्यों हो रही चर्चा?
गीतांजलि आंग्मो का बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि उन्होंने किसी एक राजनीतिक दल की बजाय BJP और कांग्रेस दोनों की आलोचना की है। उन्होंने राजनीतिक दलों के समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर विरोधियों को अलग-अलग लेबल देने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया है।